नई दिल्ली। अमावस्या तिथि पितरों की पूजा और आत्मिक शुद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य लाभ प्राप्त होता है। लेकिन इस बार वैशाख अमावस्या पर पंचक का प्रभाव भी रहेगा, जिससे यह समय ज्योतिषीय दृष्टि से अधिक संवेदनशील माना जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार इस दौरान की गई गलतियां जीवन में बाधाएं, अशांति और परेशानियां बढ़ा सकती हैं।
17 अप्रैल को अमावस्या, पहले से चल रहे हैं पंचक
17 अप्रैल 2026 को वैशाख अमावस्या मनाई जाएगी। पंचक 13 अप्रैल 2026 की तड़के सुबह से शुरू होकर 17 अप्रैल को दोपहर 12:02 बजे समाप्त होंगे। ऐसे में अमावस्या का स्नान-दान और पितृ कर्म पंचक के प्रभाव में संपन्न होंगे।
इन कार्यों से बचना माना गया आवश्यक
इन कार्यों से बचना माना गया आवश्यक
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में कुछ कार्यों से बचना बेहद जरूरी है। जैसे कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन या जनेऊ जैसे मांगलिक कार्य टालने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा दक्षिण दिशा की यात्रा से बचना भी शुभ माना गया है।
लकड़ी, निर्माण और खरीदारी में बरतें सावधानी
लकड़ी, निर्माण और खरीदारी में बरतें सावधानी
पंचक के दौरान लकड़ी या ज्वलनशील वस्तुओं की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा पलंग या बिस्तर जैसी वस्तुएं खरीदना भी अशुभ माना जाता है। इसी तरह घर के निर्माण की शुरुआत या छत डालने का काम भी इस समय नहीं करना चाहिए।
रात के समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह
अमावस्या की रात को नकारात्मक शक्तियों की सक्रियता की मान्यता के चलते सुनसान जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही बुजुर्गों और पितरों के सम्मान का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है, क्योंकि इस दिन इसका उल्लंघन अत्यंत अशुभ माना जाता है।
शुभ फल पाने के लिए किए जाने वाले उपाय
शुभ फल पाने के लिए किए जाने वाले उपाय
इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना और गंगाजल का छिड़काव करना भी सकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से बचाव के उपाय के रूप में बताया गया है।
