दिन की शुरुआत घर के मुख्य द्वार की सफाई से करें। मुख्य प्रवेश द्वार पर गंदगी या अनावश्यक सामान नहीं होना चाहिए क्योंकि वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश मार्ग माना गया है। यदि संभव हो तो सुबह रंगोली बनाएं और घी का दीपक जलाकर माता लक्ष्मी का स्मरण करें।
घर के उत्तर और उत्तर पूर्व दिशा को साफ और खुला रखें। इन दिशाओं को धन और शुभ ऊर्जा का क्षेत्र माना जाता है। यहां भारी सामान कबाड़ या टूटी हुई वस्तुएं रखने से आर्थिक उन्नति में बाधा आने की मान्यता है। यदि ऐसी कोई वस्तु हो तो उसे तुरंत हटा दें।
शुक्रवार के दिन रसोईघर की विशेष सफाई करना शुभ माना जाता है। गैस चूल्हे और भोजन बनाने की जगह को साफ रखें। अन्न का अपमान न करें और रसोई में बर्तन लंबे समय तक गंदे न छोड़ें। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
पूजा स्थल में सफेद या गुलाबी रंग के फूल अर्पित करें। माता लक्ष्मी को कमल का फूल विशेष प्रिय माना जाता है। यदि कमल उपलब्ध न हो तो सुगंधित सफेद फूल भी अर्पित किए जा सकते हैं। शाम के समय घी का दीपक जलाकर श्रीसूक्त या लक्ष्मी मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
शुक्रवार को घर में टूटे हुए कांच बंद घड़ी फटे हुए जूते चप्पल या बेकार इलेक्ट्रॉनिक सामान लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए। ऐसी वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा का कारण मानी जाती हैं और तरक्की में रुकावट पैदा कर सकती हैं।
धन रखने की अलमारी को दक्षिण पश्चिम दिशा में रखना और उसका मुंह उत्तर या पूर्व दिशा की ओर खुलना शुभ माना जाता है। अलमारी में स्वच्छता बनाए रखें और उसमें अनावश्यक कागज या बेकार सामान जमा न करें। इससे धन संबंधी ऊर्जा संतुलित रहती है।
यदि घर में तुलसी का पौधा है तो शुक्रवार शाम उसके पास दीपक जलाएं। इससे घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही घर के सभी सदस्यों को मीठा बोलने और अनावश्यक विवाद से बचने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि वास्तु केवल भवन का नहीं बल्कि व्यवहार का भी विज्ञान माना जाता है।
आज का संदेश यही है कि छोटी छोटी सकारात्मक आदतें और स्वच्छता ही बड़े वास्तु दोषों को कम करने का आधार बन सकती हैं। श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ किए गए उपाय घर में सुख शांति और समृद्धि का वातावरण बनाने में सहायक माने जाते हैं।
