ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है, जहां पेट्रोल की कालाबाजारी की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर पेट्रोल 150 से 180 रुपए प्रति लीटर तक बेचा जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
मांगलिया डिपो पर नहीं मिला समाधान
पेट्रोल पंप संचालक संघ के जिला अध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने बताया कि संकट के समाधान के लिए संचालक इंदौर स्थित मांगलिया डिपो पहुंचे थे। लेकिन आरोप है कि वहां अधिकारियों ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया। करीब एक घंटे इंतजार के बाद संचालकों को बिना किसी ठोस आश्वासन के वापस लौटना पड़ा। पंप संचालकों का कहना है कि टैंकरों की समय पर आपूर्ति नहीं होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है, जिससे पूरे जिले में ईंधन संकट गहराता जा रहा है।
राशनिंग से भी राहत नहीं, वाहनों पर असर
जिले में जिन 10 पेट्रोल पंपों पर थोड़ा-बहुत स्टॉक बचा है, वहां भीड़ नियंत्रण के लिए राशनिंग व्यवस्था लागू की गई है। बाइक चालकों को 100 से 200 रुपए तक और डीजल वाहनों को अधिकतम 500 रुपए तक का ही ईंधन दिया जा रहा है। ईंधन की कमी के कारण ट्रैक्टर, मालवाहक वाहन और अन्य परिवहन साधनों के पहिये थमने लगे हैं, जिससे कृषि और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
48 घंटे से परेशान लोग, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
पिछले 48 घंटों से जिले के अधिकांश पेट्रोल पंप बंद पड़े हैं। सुबह से ही लोग खाली डिब्बे और वाहनों के साथ पंपों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन “स्टॉक खत्म” के बोर्ड देखकर निराश लौटना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तेल कंपनियों के साथ समन्वय कर तुरंत आपूर्ति बहाल की जाए और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
