हिंदुस्तान समाचार एजेंसी के पूर्व अध्यक्ष रवींद्र किशोर सिन्हा के दिवंगत होने के समाचार से मन क्लांत है। एक पत्रकार होने के नाते मैं रवीन्द्र किशोर सिन्हा जी से पहली बार वर्ष 13 जनवरी 2018 को भोपाल कार्यशाला में मिला ओर मध्यप्रदेश की पत्रकारिता पर उनके विजन को समझा जिसमें श्री सिन्हा की पत्रकारिता का मूलाधार पूर्णतया राष्ट्रीयता का भाव रहा है, जिसकी गूंज आद्योपांत उनके प्रत्येक लेखों में पढ़ने को मिलती है। उन्होंने भारत को भारत के नजरिए से समझने-समझाने का प्रयास किया है, जो अत्यंत सराहनीय तो है ही, बोधप्रद भी है। इस दृष्टि का अभाव जो मीडिया में दिखता है, उसे ये अपनी दृष्टि से दिखाने का प्रयास करते रहे है। श्री सिन्हा जी के अंदर हिंदुस्तान समाचार एजेंसी को विश्वपटल पर ले जाने की तीव्र जुगुत्सा का प्रतिफल रही की वे जब तक हिंदुस्तान समाचार एजेंसी के अध्यक्ष रहे, देश के सभी जिलों के एजेंसी के पत्रकारों की 4 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन देहारादून में रखकर अपने दायित्व का निर्वहन करते रहे ताकि हिंदुस्तान समाचार एजेंसी के पत्रकारो का मनोबल ऊंचा रहे ओर उनकी लेखनी को एक दिशा मिले। उन्होने एजेंसी के पत्रकारों के साथ साथ उनके परिवारों में उनकी पत्नी ओर बच्चों तक को देहरादून कार्यशाला में आमंत्रित कर उन्हे अपनी ओर से बद्रीनाथ यात्रा कराकर पुण्यलाभ कमाकर अपने अध्यक्षीय दायित्व का पालन किया। कालक्रम की दृष्टि से रवीन्द्र किशोर सिन्हा जी का चिंतन एजेंसी के पत्रकारों के हित में फलितरूप में उजागर हुआ वही उनकी राजनीति, समाज, संस्कृति, धर्म, व्यवसाय, विदेश नीति, भाषा आदि अन्यान्य कार्य सभी समग्रता से सभी के लिए प्रस्तुत हुआ करते थे। वे आज हमारे बीच नहीं रहे, यह हिंदुस्तान समाचार एजेंसी ही नही अपितु उनके विस्तृत आयामों मे जुड़े प्रत्येक जन के लिए अपूर्णीय क्षति है।

अगर श्री सिन्हा जी के जीवन में झाँका जाये तो वे राजनीतिशास्त्र से स्नातक रहे है ओर व वही से उन्होने अपने कॅरियर की शुरुआत एक पत्रकार के रूप में की थी ओर सन् 1966 से 70 तक ‘हिंदुस्थान समाचार’ और सन् 1970 से 1974 तक ‘सर्चलाइट’ व ‘प्रदीप’ में कार्यालय संवाददाता के रूप में कार्य किया था। सन् 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में युद्ध-संवाददाता की भूमिका निभाई। इस दौरान पाक सैनिकों द्वारा बंदी भी बनाए गए और बाद में किसी तरह भाग निकले। सन् 1974-75 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन में भाग लिया और ‘जन आंदोलन’ पर पहली पुस्तक लिखी।
श्री सिन्हा ने सन् 1974 में ‘सिक्योरिटी एंड इंटेलीजेंस सर्विसेज इंडिया’ (एस.आई.एस.) की स्थापना की। एक निजी सुरक्षा विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अमेरिका, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, जापान, इंग्लैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, इटली, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, मॉरीशस, सिंगापुर, हांगकांग, फिलिपींस, इंडोनेशिया, थाईलैंड, बर्मा, बँगलादेश, भूटान, टर्की, नेपाल, चीन सहित कई अरब देशों का भ्रमण किया। अनेक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे ओर सुरक्षा विषयक सात पुस्तकें लिखी जो अंग्रेजी में ‘Me and My Guru’ & ‘By the Way’ एवं हिंदी में ‘महामानव मृत्युंजय’, ‘बेलाग लपेट’ तथा ‘समय का सच’ मुख्यरूप से हैं।
श्री सिन्हा सन् 1999-2004 के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के शासनकाल में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, विज्ञान व तकनीकी एवं समुद्री विकास मंत्रालय में सुरक्षा सलाहकार रहे। बहुआयामी प्रतिभा के धनी आर. के. सिन्हा ने देहरादून में ‘द इंडियन पब्लिक स्कूल’ की स्थापना की। वे कई सामाजिक और कल्याणकारी संस्थाओं के अध्यक्ष हैं। फरवरी 2014 में ‘भारतीय जनता पार्टी’ की ओर से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए ओर सांसद रहते ‘हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी’ के अध्यक्ष रहे हैं। उनके अचानक दिवंगत होने से हिंदुस्तान समाचार एजैंसी परिवार का हर पत्रकार दुखी है ओर वे सभी प्रभु से श्री सिन्हा की आत्मा को अपने चरणों में स्थान देने की प्रार्थना कर रहे है ओर यही हम सबकी उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
