जानकारी के अनुसार, आग शनिवार और रविवार की दरमियानी रात लगी थी, लेकिन इसका पता सुबह तब चला जब पास की एक बिल्डिंग के गार्ड ने कॉम्प्लेक्स की खिड़कियों से धुआं निकलते देखा। शुरुआत में उसे लगा कि यह रेस्टोरेंट के किचन से उठने वाला सामान्य धुआं है, लेकिन जब धुएं के साथ आग की लपटें दिखाई देने लगीं तो उसने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी।
एलर कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट में ‘बापू की कुटिया’ सहित कई प्रतिष्ठान संचालित हैं, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर प्रसिद्ध फूड आउटलेट और अन्य दुकानें मौजूद हैं। आग मुख्य रूप से दूसरी मंजिल पर स्थित ‘भोज इन’ रेस्टोरेंट से शुरू हुई। बताया गया कि रेस्टोरेंट का किचन तीसरी मंजिल पर बना हुआ है, जहां से आग ने विकराल रूप लेना शुरू किया और धीरे-धीरे अन्य हिस्सों की ओर फैलने लगी।
सूचना मिलते ही शहर के विभिन्न फायर स्टेशनों से आठ दमकल वाहन और तीन वाटर टैंकर मौके पर भेजे गए। आग इतनी घनी थी कि दमकलकर्मियों को सीधे अंदर प्रवेश करने में कठिनाई हुई। स्थिति को देखते हुए उन्होंने इमारत की दीवार तोड़कर अंदर जाने का फैसला किया। इसके बाद टीम ने अंदर पहुंचकर आग बुझाने का अभियान शुरू किया।
हादसे के दौरान सबसे बड़ा खतरा रेस्टोरेंट के किचन में रखे चार कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों से था। यदि आग इन सिलेंडरों तक पहुंच जाती तो बड़ा विस्फोट हो सकता था और नुकसान कई गुना बढ़ सकता था। दमकलकर्मियों ने सूझबूझ और तेजी दिखाते हुए सबसे पहले सिलेंडरों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
फायर ऑफिसर सौरभ पटेल के अनुसार प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट प्रतीत हो रहा है। घटना के समय रेस्टोरेंट बंद था और अंदर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि नहीं हुई। उन्होंने बताया कि रेस्टोरेंट में अग्निशमन यंत्र मौजूद थे, लेकिन आग की तीव्रता अधिक होने के कारण फायर ब्रिगेड की मदद जरूरी हो गई।
आग से उठता धुआं इतना अधिक था कि वह करीब पांच किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रहा था। आसपास के लोगों में भी दहशत का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। फायर ब्रिगेड ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए आग को अन्य दुकानों और प्रतिष्ठानों तक फैलने से रोक लिया।
फिलहाल प्रशासन और फायर विभाग नुकसान का आकलन कर रहे हैं। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद आग लगने के वास्तविक कारणों और सुरक्षा मानकों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
