घायल मजदूरों का कहना है कि ब्लास्ट के बाद से उनके साथी राजू और बाबुल का कोई पता नहीं चल पाया है। दोनों बिहार के अरहरिया जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं और कुछ महीने पहले ही रोज़गार की तलाश में देवास आए थे।
देवास जिला अस्पताल में भर्ती घायल मजदूर शशि कुमार ने बताया कि हादसे से पहले उनकी दोनों साथियों से खाना खाते समय बातचीत हुई थी। इसके बाद वे आखिरी बार फैक्ट्री के बिलिंग रूम के पास दिखाई दिए। धमाके के बाद से दोनों न तो अस्पतालों में मिले और न ही किसी से संपर्क हो पाया।
साथी मजदूरों को आशंका है कि कहीं दोनों भी हादसे का शिकार तो नहीं हो गए। मजदूर लगातार प्रशासन से घटना स्थल पर जाकर तलाश करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अस्पतालों, आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों से संपर्क कर लिया, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिला।
इस दर्दनाक हादसे में अब तक जिन मजदूरों की मौत हुई है, उनमें बिहार के सुमित, धीरज, अमर और गुड्डू शामिल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी सनी की भी जान गई है। मृतकों के शव देर रात परिजनों को सौंप दिए गए।
वहीं हादसे में घायल कई मजदूरों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। देवास जिला अस्पताल में 11 लोग भर्ती हैं, जबकि गंभीर घायलों को निजी अस्पतालों में रेफर किया गया है।
प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री पूरी तरह तैयार होने से पहले ही वहां पटाखा निर्माण शुरू कर दिया गया था। श्रम विभाग की रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने या स्टैटिक चार्ज बनने से विस्फोट हुआ होगा।
रिपोर्ट में सुरक्षा नियमों की भारी अनदेखी, फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी लाइसेंस का अभाव, अग्निशमन व्यवस्था में कमी और इमरजेंसी प्लान न होने जैसी गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। इन मामलों में फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
