जानकारी के अनुसार चेतन (पिता जगदीश बाली), जो वाल्मीकि समाज से था, रविवार शाम करीब 5 बजे घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की तो तालाब किनारे उसकी चप्पलें मिलीं, जिससे डूबने की आशंका गहरा गई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
रात में शुरू हुआ रेस्क्यू, अंधेरे के कारण रोका गया ऑपरेशन
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय गोताखोरों की मदद से शाम करीब 6 बजे सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। कई घंटे की तलाश के बावजूद सफलता नहीं मिली तो एसडीआरएफ (SDERF) टीम को बुलाया गया। रात करीब 10:30 बजे तक टीम ने तालाब के अलग-अलग हिस्सों में सर्चिंग की, लेकिन कम दृश्यता और अंधेरे के कारण रेस्क्यू रोकना पड़ा।
सुबह फिर शुरू हुआ सर्च, दो घंटे में मिला शव
सोमवार सुबह एक बार फिर एसडीआरएफ और गोताखोरों की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सुबह 10:30 बजे से सघन तलाशी अभियान चलाया गया और करीब पौने दो घंटे की मेहनत के बाद दोपहर 12:15 बजे किशोर का शव तालाब से बाहर निकाल लिया गया। शव मिलने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और गांव में मातम छा गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में जुटी, हर एंगल से पड़ताल जारी
नाहरगढ़ थाना पुलिस इस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है कि यह हादसा था या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। फिलहाल प्रारंभिक रूप से इसे डूबने की घटना माना जा रहा है।
