उज्जैन में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगातार कई ई रिक्शा चलते चलते अचानक बंद हो गए। हर बार एक युवक मौके पर पहुंचता और खुद को मैकेनिक बताकर कुछ ही देर में वाहन चालू कर देता। शुरुआत में चालकों को यह सामान्य तकनीकी खराबी लगी लेकिन जब एक जैसी घटनाएं बार बार होने लगीं तो ई रिक्शा एसोसिएशन को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई और चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई।
बुधवार शाम लोटी स्कूल तिराहे पर एक ई रिक्शा अचानक बंद हुआ। कुछ देर बाद एक युवक वाहन ठीक करने के नाम पर तीन सौ रुपये मांगने पहुंचा। पहले से सतर्क चालक ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पूछताछ में उसकी पहचान रीतेश भानूपा के रूप में हुई। जांच में खुलासा हुआ कि वह मोबाइल में उपलब्ध एक बैटरी मैनेजमेंट ऐप के जरिए ब्लूटूथ से आसपास मौजूद ई रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम तक पहुंच बनाता था। जहां सुरक्षा के लिए पासवर्ड नहीं लगा होता था वहां से वह बैटरी लॉक कर देता और बाद में पैसे लेकर उसे दोबारा चालू कर देता था।
इस तरह की घटनाएं केवल उज्जैन तक सीमित नहीं रहीं। भोपाल के पुराने शहर में भी कई ई रिक्शा बीच रास्ते में अचानक बंद हो गए। चालकों का आरोप है कि बैटरी लॉक होने के बाद उन्हें कंपनी के सर्विस सेंटर तक जाना पड़ा जहां अनलॉक करने के नाम पर उनसे अतिरिक्त पैसे लिए गए। इससे उनकी रोजी रोटी प्रभावित हुई और यात्रियों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी। कई जगह विवाद की स्थिति भी बन गई।
ई रिक्शा चालकों का कहना है कि वाहन अचानक बंद होने से दिनभर की कमाई पर असर पड़ता है। स्कूल के बच्चों को लाने ले जाने वाले चालकों और रोजाना सवारी ढोने वालों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कई चालकों ने बताया कि एक ही दिन में उनकी गाड़ी कई बार बंद हुई जिससे काम पूरी तरह ठप हो गया।
पुलिस के अनुसार संबंधित मोबाइल ऐप सामान्य रूप से उपलब्ध है और यदि ई रिक्शा की बैटरी का ब्लूटूथ पासवर्ड से सुरक्षित नहीं है तो कुछ मॉडलों में उसका दुरुपयोग किया जा सकता है। इसी वजह से अब कई कंपनियां ब्लूटूथ के लिए पासवर्ड सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी बैटरी का सुरक्षा पासवर्ड तुरंत सक्रिय कराएं और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को वाहन या मोबाइल सिस्टम तक पहुंच न दें।
पुलिस पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने चालकों को इस तरीके से निशाना बनाया गया और सुरक्षा में कहां चूक हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक जितनी सुविधाजनक है उतनी ही सतर्कता की भी मांग करती है। समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाकर ही इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सकता है।
