भोपाल के कई ऑटो मैकेनिकों का दावा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाली कुछ गाड़ियों में फ्यूल पंप जल्दी खराब होने और फ्यूल सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें देखने को मिल रही हैं। उनका कहना है कि पहले जिन वाहनों में फ्यूल पंप वर्षों तक बिना किसी परेशानी के चलता था अब कुछ मामलों में उसे अपेक्षाकृत कम समय में बदलना पड़ रहा है। हालांकि यह अनुभव सभी वाहनों पर समान रूप से लागू नहीं होता और यह वाहन की तकनीक तथा उसकी स्थिति पर भी निर्भर करता है।
मैकेनिकों के अनुसार जिन वाहनों का लंबे समय तक उपयोग नहीं होता उनमें इथेनॉल मिश्रित ईंधन अधिक समय तक टैंक में रहने पर नमी खींच सकता है। इससे फ्यूल सिस्टम में गंदगी या जंग जैसी समस्याएं पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में फ्यूल फिल्टर और फ्यूल पंप पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन है और इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर देने का भी उद्देश्य है। लेकिन यह भी जरूरी है कि वाहन निर्माता कंपनियों के निर्देशों का पालन किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित वाहन E20 ईंधन के अनुकूल है।
ऑटो विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि वाहन लंबे समय तक खड़ा रहने वाला है तो समय समय पर उसे स्टार्ट करना चाहिए ताकि फ्यूल सिस्टम सक्रिय रहे। साथ ही निर्धारित समय पर सर्विस कराना फ्यूल फिल्टर बदलना और अच्छी गुणवत्ता का ईंधन भरवाना भी जरूरी है। इससे संभावित तकनीकी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
वाहन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपनी गाड़ी की यूजर मैनुअल में दी गई ईंधन संबंधी जानकारी को ध्यान से पढ़ें। यदि वाहन निर्माता ने E20 के उपयोग की अनुमति दी है तो उसका उपयोग सुरक्षित माना जाता है। वहीं पुराने मॉडल के वाहनों में किसी भी तरह की समस्या महसूस होने पर अधिकृत सर्विस सेंटर या विशेषज्ञ मैकेनिक से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
इथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर फिलहाल अलग अलग अनुभव सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि तकनीकी तथ्यों और वाहन निर्माता कंपनियों के दिशा निर्देशों के आधार पर ही निर्णय लिया जाए ताकि पर्यावरण संरक्षण और वाहन की बेहतर कार्यक्षमता दोनों के बीच संतुलन बना रहे।
