कृषि विभाग की टीम को इस संबंध में पहले से सूचना मिली थी, जिसके आधार पर अचानक मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की गई। छापेमारी के दौरान अधिकारियों को घर के अंदर भारी मात्रा में नकली डीएपी खाद और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद हुई। इसके अलावा कई प्रकार के रसायन और पैकिंग से जुड़े उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से नामचीन कंपनी के ब्रांडेड बैग की नकल तैयार करता था और उन्हीं में नकली खाद को पैक कर बाजार में सप्लाई करने की योजना बना रहा था। इसका उद्देश्य किसानों को असली खाद बताकर अधिक कीमत पर बेचना था। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस तरह की गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और धीरे-धीरे इसका नेटवर्क भी फैलाया जा रहा था।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार खरीफ सीजन के दौरान डीएपी खाद की मांग बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाकर ऐसे गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। किसान अपनी फसलों की बुवाई के लिए खाद पर निर्भर रहते हैं, ऐसे में मिलावटी या नकली खाद उनकी फसल और आर्थिक स्थिति दोनों पर गंभीर असर डाल सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग लगातार निगरानी और जांच अभियान चला रहा है।
छापेमारी के दौरान जब्त किए गए सभी नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि तैयार की जा रही खाद की गुणवत्ता कैसी थी और इसमें किन-किन रसायनों का उपयोग किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई और सख्त की जाएगी।
इस मामले में उर्वरक नियंत्रण आदेश और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस भी इस बात की जांच कर रही है कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं और क्या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क का हाथ है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद खरीदते समय केवल अधिकृत विक्रेताओं और प्रमाणित स्रोतों से ही सामग्री लें। साथ ही किसी भी संदिग्ध पैकेजिंग या कम कीमत वाले उत्पादों से सावधान रहने की सलाह दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों पर लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
