परिजनों के अनुसार महिला को 30 सितंबर 2023 को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सिजेरियन डिलीवरी के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिरकर 80 तक पहुंच गया। इसके बावजूद समय पर न तो उचित ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और न ही उसे बड़े अस्पताल रेफर किया गया।
स्थिति गंभीर होने पर मरीज को कमला राजा अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल में न तो योग्य विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद थे और न ही वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम जैसी बुनियादी सुविधाएं थीं। यहां तक कि अस्पताल का रजिस्ट्रेशन और व्यवस्थाएं भी संदिग्ध पाई गईं।
उपभोक्ता आयोग ने इसे “सेवा में गंभीर कमी” मानते हुए अस्पताल पर कुल ₹3.12 लाख का मुआवजा लगाने का आदेश दिया है। इसमें ₹3 लाख आर्थिक क्षतिपूर्ति, ₹10 हजार मानसिक क्षति और ₹2 हजार कानूनी खर्च शामिल हैं। आदेश के अनुसार यह राशि 45 दिनों के भीतर देनी होगी, अन्यथा 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि मरीज को समय पर बेहतर अस्पताल रेफर किया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। बिना बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं के अस्पताल चलाना मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है।
