वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम
दीक्षा की इस असाधारण उपलब्धि को World Wide Book of Records में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि सूक्ष्म कला (micro art) के क्षेत्र में एक बड़ी पहचान मानी जा रही है।
एक साल की मेहनत और कला का सफर
ऋषि नगर निवासी दीक्षा कुशवाह फ्रीगंज स्थित आर्ट क्लास में सूक्ष्म चित्रकला सीखती हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पिछले एक वर्ष में इस कला को निखारा और लगातार अभ्यास किया। इस कार्य के लिए उन्हें विशेष उपकरणों, धैर्य और अत्यधिक एकाग्रता की जरूरत पड़ी। इतने छोटे आकार में सटीक आकृतियां बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण था।
आस्था और प्रेरणा से मिली दिशा
दीक्षा ने बताया कि उन्हें 12 ज्योतिर्लिंग बनाने की प्रेरणा केदारनाथ, बद्रीनाथ और बाबा महाकाल के दर्शन के बाद मिली। साथ ही कॉलेज के अन्य छात्रों की वर्ल्ड रिकॉर्ड उपलब्धियों ने भी उन्हें प्रेरित किया।
स्थानीय प्रतिभा की वैश्विक पहचान
दीक्षा की यह उपलब्धि न केवल उज्जैन बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। यह दिखाता है कि सही मार्गदर्शन और लगन से छोटी उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
छोटी सी दाल पर इतनी सूक्ष्म कला बनाकर दीक्षा कुशवाह ने साबित कर दिया कि प्रतिभा आकार नहीं, समर्पण और अभ्यास से बनती है। उनकी यह उपलब्धि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
