संघ का दावा: पहले ही दी गई थी खतरनाक संरचनाओं की जानकारी
पटवारी संघ ने अपने ज्ञापन में मध्यप्रदेश खुले नलकूप सुरक्षा अधिनियम 2024 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में प्राथमिक जिम्मेदारी भूमि स्वामी और बोरवेल/कुआं खोदने वाली एजेंसी की होती है। ऐसे में सीधे पटवारी को दोषी ठहराकर निलंबित करना अनुचित है। संघ ने यह भी दावा किया कि जिले के पटवारियों द्वारा पहले ही बिना मुंडेर वाले कुओं और खुले बोरवेल की सूची संबंधित तहसील कार्यालयों को सौंप दी गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई केवल एक कर्मचारी पर केंद्रित करना अन्यायपूर्ण है।
राजस्व कर्मचारियों में बढ़ा असंतोष
निलंबन आदेश के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों में असंतोष तेजी से बढ़ा है। कई पटवारियों का कहना है कि यदि प्रशासन इस तरह त्वरित और कठोर कार्रवाई करेगा, तो जमीनी स्तर पर काम करना मुश्किल हो जाएगा। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि फील्ड में संसाधनों की कमी और सीमित अधिकारों के बावजूद पूरी जिम्मेदारी पटवारियों पर डाल दी जाती है, जो सही नहीं है।
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
पटवारी संघ ने प्रशासन के खिलाफ तीन चरणों में आंदोलन की घोषणा की है। पहले चरण में झाबुआ, रामा और रानापुर तहसीलों के सभी पटवारी तीन दिन के सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।
यदि इसके बाद भी निलंबन आदेश वापस नहीं लिया गया तो दूसरे चरण में जिले के सभी पटवारी तीन दिन के सामूहिक अवकाश पर जाएंगे और सरकारी सोशल मीडिया समूहों से भी बाहर हो जाएंगे। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि फिर भी मांगें नहीं मानी गईं तो आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल की स्थिति बन सकती है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, यह विवाद अब प्रशासन और राजस्व कर्मचारियों के बीच टकराव का रूप लेता दिख रहा है।
