राज्य के पांढुर्णा और मंडला जैसे जिलों में पेट्रोल की कीमत 111.29 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि मैहर, अलीराजपुर और अनूपपुर जैसे इलाकों में डीजल 96.50 रुपए प्रति लीटर तक बिक रहा है। इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में भी पेट्रोल की कीमतें 109 रुपए प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुकी हैं।
पड़ोसी राज्यों से बड़ा अंतर, एमपी सबसे महंगा
तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में ईंधन की कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी अधिक हैं। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल करीब ₹14 और डीजल ₹5 प्रति लीटर तक सस्ता मिल रहा है। गुजरात में पेट्रोल लगभग ₹13 और डीजल ₹3 तक कम है। राजस्थान में दोनों ईंधन करीब ₹2 तक सस्ते हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में पेट्रोल की कीमतें लगभग ₹8 तक कम दर्ज की गई हैं। महाराष्ट्र में भी पेट्रोल ₹4 से ₹5 प्रति लीटर तक सस्ता मिल रहा है। इस बड़े अंतर ने राज्य में टैक्स संरचना को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है।
टैक्स स्ट्रक्चर पर उठे सवाल, एक्सपर्ट्स ने बताया वजह
विशेषज्ञों के अनुसार मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों की एक बड़ी वजह वैट (VAT) और राज्य करों का अधिक होना है। इसी वजह से ऑयल कंपनियों द्वारा समान बेस प्राइस होने के बावजूद यहां अंतिम कीमत अन्य राज्यों से अधिक हो जाती है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर टैक्स ढांचे में राहत दी जाए, तो उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से परिवहन, कृषि और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की लागत भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जनता पर “महंगाई का बोझ” लगातार बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ CNG और गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़े हैं, जिससे आम लोगों का बजट बिगड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार को एक्साइज ड्यूटी और वैट में कमी कर जनता को राहत देनी चाहिए।
आम जनता पर असर
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर ट्रांसपोर्ट, खेती, छोटे व्यापार और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की कतारें और बढ़ी हुई लागत लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं।
