आत्माराम यादव चीफ एडिटर
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के कथन की पुष्टि – फर्जी डिग्री का काकरोच मिला
नर्मदापुरम 18 जून 2026 (हिन्द संतरी) भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक माह पूर्व ही न्यायालय की अवमानना से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि सिस्टम पर हमला करने वाले और फर्जी डिग्री के सहारे वकालत करने वाले कुछ बेरोजगार युवा ‘कॉकरोच’ की तरह होते हैं, आज मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिला सत्र न्यायालय मेँ सच साबित हुई जब यह खुलासा न्याय के मंदिर में ‘फर्जी लेडी वकील’ का खतरनाक खेल, रुबीना शेख काकरोच के रूप मेँ उभरकर सामने आई जो ‘उपाध्याय’ सरनेम के नाम से जानी पहचानी जाती रही ओर उनके द्वारा नर्मदापुरम वासियों को ब्लैकमेलिंग के साथ साथ उनका धर्मांतरण मेँ भी नाम आया है। यह आश्चर्यजनक बात है कि न्याय की चौखट और कानून के रखवालों की नाक के नीचे जालसाजी, पहचान की चोरी और सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का एक ऐसा सनसनीखेज मामला कैसे ओर किसकी शह पर चलता रहा यह सभी के दिमाग पर चार सो चवालीस का करंट लगने जैसा है।

सोसल मीडिया के माध्यम से यह बात सीजेआई के पास भी पहुची कि “भारत में 30 प्रतिशत वकील ‘नकली’ हैं और 20 प्रतिशत वकील कम पढ़े लिखे होते हुये धोखाधड़ी व फर्जी तरीके से वकील की डिग्री हासिल कर वकायदा काम कर रहे हैं” ! मनन कुमार मिश्रा बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन और भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सांसद के अलावा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं जिन्हे सातवीं बार बार काउंसिल ऑफ इंडिया का अध्यक्ष चुना गया है के समक्ष 50 प्रतिशत फर्जी वकील ओर शेष बचे 50 प्रतिशत डिग्रीधारी असल वकील का मुद्दा सीजेआई के संज्ञान मेँ आने पर ही उनको कहना पड़ा कि फर्जी डिग्री के सहारे वकालत करने वाले कुछ बेरोजगार युवा ‘कॉकरोच’ की तरह होते हैं, भले उनके कथन पर विवाद के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा सभी युवाओं या मीडिया की तरफ नहीं था, बल्कि उन असामाजिक तत्वों की तरफ था जो फर्जी डिग्री के जरिए वकालत जैसे गंभीर पेशे में घुस आए हैं। उनका कथन नर्मदापुरम मे सच साबित होने के बाद मामले पर सुरक्षा एजेंसियों सहित न्यायिक प्रशासन के कान खड़े हो गए।
ग्वालटोली के सिंधी कालोनी जैसे पॉश इलाके से जुड़े संजय नगर मेँ उपाध्याय सरनेम का चेहरा जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारियों- पुलिस थानों सहित जिला न्यायालय परिसर मेँ सालों तक सेकड़ों लोगों के आवेदन लेकर उन्हे निराकरन कराने मेँ जुटा रहा किन्तु किसी को भी उसपर शक नहीं हुआ कि वह खूबसूरत चेहरा सनातन धर्म के रक्षक उपाध्याय का नहीं अपितु अल्पसंखयक परिवार का है। जैसे है लोगो को पता चला कि फर्जी महिला वकील रूबीना शेख आठवी तक पढ़ी है पर फर्जी वकील कि डिग्री लेकर पिछले कई सालों से एक वरिष्ठ वकील कि जूनियर बनकर वकालत मेँ अपनी पृथक पहचान बना चुकी है तो सभी सन्न रह गए ओर कानून के रक्षकों ओर वकीलों के पैरो तले जमीन खिसक गई। एक तो गंभीर अपराध मेँ फर्जी डिग्री ओर दूसरे रबीना शेख नाम से नकाब उठते ही हकीकत सामने आई की सालों से ‘उपाध्याय’ उपनाम (सरनेम) का जो मुखौटा घूम रहा था, वह भी नकली निकला।
नर्मदापुरम का सबसे ज्यादा चौकाने वाला यह मामला उजागर हुआ तो सबकी बैचेनी देखने लायक थी कि यह महिला खुद को समाज में हिंदू और कोर्ट में कानून की रखवाली बताने वाली हिन्दू कार्ड से सबका मान सम्मान पाती रही पर वास्तव मेँ यह हिन्दू नही बल्कि इस महिला का असली नाम रुबीना शेख निकला। आरोप है कि यह फर्जी महिला वकील न सिर्फ पहचान बदलकर लोगों को चूना लगा रही थी, बल्कि कोर्ट की गरिमा को तार-तार करते हुए वकालत का फर्जी धंधा भी चला रही थी। स्थानीय हिंदू संगठनों की मुस्तैदी और खुफिया इनपुट्स के बाद इस पूरे नेक्सस (नेटवर्क) का भंडाफोड़ हुआ है। उपाध्याय’ का फर्जीवाड़ा पहचान की चोरी और धर्मांतरण का संदिग्ध नेटवर्क खोजी कड़ियों को जोड़ने पर पता चला है कि रुबीना खान ने बेहद शातिर और सोची-समझी रणनीति के तहत अपनी असल धार्मिक पहचान को छुपाया। उसने नर्मदापुरम जैसे शांत ओर धार्मिक पहचान वाले नगर में मकान हासिल करने के लिए ‘उपाध्याय’ सरनेम का सहारा लिया और सालों तक इस झूठ को सच बनाकर रही।
हिंदू लड़कियों को बरगलाने और माइंड वाश करने का काम
यह मामला सिर्फ एक फर्जी नाम से कमरा किराए पर लेने का नहीं है, इसके पीछे की कहानी बेहद गंभीर है। गंभीर आरोप रुबीना शेख पर पूर्व में कई हिंदू लड़कियों को बरगलाने, उनका माइंड वॉश करने और फिर उनका अवैध धर्मांतरण कराकर मुस्लिम समुदाय में शादियां कराने के गंभीर आरोप लग चुके हैं। संगठित गिरोह की आशंका हिंदू संगठनों को जब इस संदिग्ध गतिविधि की भनक लगी, तो उन्होंने अपने स्तर पर पड़ताल शुरू की। जांच में सामने आया कि महिला अकेले काम नहीं कर रही थी, बल्कि उसके पीछे एक बड़ा और संगठित सिंडिकेट है, जो समाज के सीधे-साधे लोगों को अपना शिकार बना रहा था।
सिस्टम को तमाचा: ‘आठवीं फेल’ महिला और कोर्ट में ‘अवैध’ वकालत
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे डरावना और हैरान कर देने वाला पहलू यह है कि जो महिला महज आठवीं फेल है, जिसके पास शिक्षा के नाम पर बुनियादी डिग्रियां तक नहीं हैं, वह जिला न्यायालय परिसर जैसी अति-सुरक्षित और संवेदनशील जगह पर काली कोट पहनकर खुद को ‘अधिवक्ता’ (वकील) साबित कर रही थी। सूत्रों के मुताबिक, रुबीना खान ने कोर्ट में एंट्री लेने के लिए नगर के ही एक सीनियर वकील का दामन थामा था। वह उन सीनियर वकील की असिस्टेंट (जूनियर) बनकर कोर्ट परिसर में दाखिल हुई और धीरे-धीरे खुद को एक रसूखदार अधिकृत वकील के रूप में स्थापित कर लिया। यहां सीधे तौर पर दो बड़े तीखे सवाल खड़े होते हैं, बिना किसी कानूनी डिग्री, बार काउंसिल के रजिस्ट्रेशन या वेरिफिकेशन के, एक कम पढ़ी-लिखी महिला न्याय के सबसे बड़े केंद्र में सालों तक लोगों के साथ छल-कपट कैसे करती रही? क्या कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था इतनी लचर है? उन सीनियर वकील की इस पूरे खेल में क्या भूमिका है, जिन्होंने इस फर्जी महिला को न सिर्फ अपनी जूनियर बनाकर कोर्ट में प्रवेश दिलाया बल्कि उसे कानूनी संरक्षण भी दिया? क्या उन्हें इस असलियत की जानकारी नहीं थी?
ब्लैकमेलिंग, अवैध उगाही और रसूखदारों का संरक्षण अब उच्च स्तरीय जांच की मांग हिंदू संगठनों और स्थानीय नागरिकों के तीखे आक्रोश के बाद अब यह मामला पूरी तरह तूल पकड़ चुका है। शुरुआती पड़ताल की परतें इशारा कर रही हैं कि रुबीना शेख भोली-भाली जनता को अपनी फर्जी वकालत और कथित रसूख के जाल में फंसाती थी। इसके बाद शुरू होता था मुकदमों का डर दिखाकर ब्लैकमेलिंग और मोटी रकम की अवैध उगाही का गंदा खेल। स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि जिला बार एसोसिएशन और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित करे।
धर्माचार्य सोमेश परसाई जी का कहना है कि –
हिन्दू धर्म उदात्त ही नही अपितु उदारमना है ओर मूलरूप से सभी धर्मों का सम्मान कर उन्हे स्वीकारता है किन्तु इस तरह का गंभीर कृत्य कर अपने धर्म को छिपाकर दूसरे धर्म के नाम से अपनी पहचान बनाकर रहना संविधान का उल्लंघन है ओर यह अक्षम्य अपराध है। जो सालों तक न्यायालय मेँ फर्जी वकील के रूप मेँ समाज ओर कानून को धोखा देने कि बात आई है वह गंभीर जांच का विषय है ओर किसी भी रूप मेँ यह क्षमा करने जैसा नहीं है।
नर्मदापुरम मेँ मंदिर समिति के अध्यक्ष व नर्मदा मंदिर के महंत पंडित गोपाल खद्दर का कहना है कि
वकालत की डिग्री लेने के बाद कौर्ट मेँ वकालत की सनद के बाद ही कोई वकालत कर सकता है फिर यह कम पढ़ी महिला वकील कैसे प्रेक्टिस करती रही यह धोखाधड़ी है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच होना चाहिए ओर जो दूसरे धर्म की होकर सनातनियों के धर्म परिवर्तन के आरोप सामने आए है वह सामने आना चाहिए। यह शर्मनाक है जिसमें महिला को मकान देने वाले भी जिम्मेदार है।
