नीलेश यादव जिला ब्यूरो
पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा थोटा के नेतृत्व में समर्पण के सहयोग से ग्रामीण और आदिवासी स्कूलों में शिक्षा सामग्री, पुनः उपयोग योग्य सैनिटरी पैड और बालिका सुरक्षा की जानकारी
नर्मदापुरम 09अगस्त 2026 (हिन्द संतरी )नर्मदापुरम पुलिस ने सामुदायिक पुलिसिंग को शिक्षा, स्वास्थ्य, बालिका सुरक्षा और नशामुक्ति जागरूकता से जोड़ते हुए जिले के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में एक विशेष पहल शुरू की है। पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा थोटा के नेतृत्व में सामाजिक संस्था समर्पण के सहयोग से सरकारी स्कूलों में बच्चों को एक वर्ष की आवश्यक शिक्षा सामग्री और स्कूल बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किशोरियों को पुनः उपयोग किए जा सकने वाले कपड़े के सैनिटरी पैड देने के साथ मासिक धर्म स्वच्छता, गुड टच, बैड टच, छेड़छाड़, महिला अपराध और व्यक्तिगत सुरक्षा जैसे विषयों पर जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ बच्चों और किशोरों को “नशे से दूरी है जरूरी” का संदेश देते हुए नशामुक्ति के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों को एक साथ संबोधित करना है। विशेष रूप से केसला, बाबई और नर्मदापुरम जिले के अन्य ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां बच्चों और किशोरियों के लिए इन बुनियादी सुविधाओं और जानकारियों तक पहुंच सीमित है।

पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा थोटा ने कहा, “हमारा मानना है कि पुलिस की भूमिका अपराध होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अपराध की रोकथाम के लिए जागरूकता और समुदाय के साथ विश्वास का संबंध उतना ही जरूरी है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की बालिकाओं के सामने शिक्षा, मासिक धर्म स्वच्छता और व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियां होती हैं। इसलिए हमने ऐसे स्कूलों को प्राथमिकता दी है, जहां इन संसाधनों और जानकारियों की सबसे अधिक आवश्यकता है। हमारा प्रयास है कि बच्चों, विशेषकर बेटियों, को पढ़ाई के साधन भी मिलें और वे अपनी सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक भी हों। इसके साथ ही बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करना भी हमारी प्राथमिकता है। आने वाले समय में इस पहल का दायरा और बढ़ाया जाएगा तथा इसे अधिक क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।”
बाबई थाना क्षेत्र के सीएम राइज सांदीपनि विद्यालय में लगभग 600 बच्चों तक पहुंची पहल
इसी क्रम में बाबई थाना क्षेत्र के सीएम राइज सांदीपनि विद्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में एसडीओपी श्री संजू सिंह चौहान एवं थाना प्रभारी सुश्री कंचन सिंह ठाकुर की मौजूदगी रही। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने बच्चों और किशोरियों से संवाद करते हुए उन्हें गुड टच, बैड टच, छेड़छाड़, महिला अपराध और व्यक्तिगत सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों के बारे में जानकारी दी। बच्चों को असुरक्षित व्यवहार को पहचानने, ऐसी स्थिति में सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेने के बारे में भी समझाया गया। कार्यक्रम के दौरान “नशे से दूरी है जरूरी” का संदेश भी प्रमुखता से दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों और इससे दूर रहने के महत्व के बारे में जानकारी दी तथा नशामुक्त जीवन के लिए जागरूक किया।
कार्यक्रम के दौरान लगभग 450 बच्चों को स्कूल बैग और आवश्यक शिक्षा सामग्री प्रदान की गई, जबकि लगभग 150 किशोरियों को कपड़े से बने पुनः उपयोग योग्य सैनिटरी पैड दिए गए। इस प्रकार कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 600 बच्चों और किशोरियों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी यह पहल पहुंची।बच्चों को दी गई शिक्षा सामग्री में नोटबुक, पेन, पेंसिल, क्रेयॉन और ड्राइंग बुक सहित लगभग एक वर्ष की पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री शामिल है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरी स्टेशनरी की कमी किसी बच्चे की पढ़ाई और नियमित स्कूल उपस्थिति में बाधा न बने।

मासिक धर्म स्वच्छता पर विशेष जोर
पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। समर्पण संस्था द्वारा किशोरियों को कपड़े से बने पुनः उपयोग योग्य सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जा रहे हैं और इनके सही उपयोग, धुलाई, सुखाने तथा स्वच्छता से जुड़ी जानकारी भी दी जा रही है।
इन पैड का लंबे समय तक दोबारा उपयोग किया जा सकता है। इससे हर महीने सैनिटरी उत्पाद खरीदने का खर्च कम होता है और ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादों की नियमित उपलब्धता की समस्या का व्यावहारिक समाधान भी मिलता है। सही उपयोग और स्वच्छता की जानकारी के साथ इनका उद्देश्य किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान स्कूल जाने में होने वाली कठिनाइयों को कम करना भी है।
शिक्षा, सुरक्षा और नशामुक्ति के जरिए बच्चों के बेहतर भविष्य की ओर
इस अभियान को केवल सामग्री वितरण तक सीमित नहीं रखा गया है। नर्मदापुरम पुलिस इसे बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और बच्चों में नशामुक्ति जागरूकता से जोड़कर आगे बढ़ा रही है। एक ओर किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़े साधन और जानकारी दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को महिला अपराध, छेड़छाड़, व्यक्तिगत सुरक्षा और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर रही है।
इसके साथ बच्चों को स्कूल बैग और पूरे वर्ष के लिए जरूरी शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराकर उनकी नियमित शिक्षा को सहयोग देने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षा सामग्री की उपलब्धता बच्चों के लिए स्कूल की तैयारी को आसान बनाने के साथ उनकी नियमित उपस्थिति को भी प्रोत्साहित कर सकती है।
समर्पण की संस्थापक डॉ. रूमा भार्गव ने कहा, “किसी बालिका के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा तीन अलग विषय नहीं हैं। अगर उसके पास स्कूल जाने के लिए जरूरी सामग्री नहीं है, मासिक धर्म के दौरान सुरक्षित साधन उपलब्ध नहीं हैं या वह अपनी सुरक्षा और अधिकारों को लेकर जागरूक नहीं है, तो इसका असर उसकी शिक्षा और आत्मविश्वास पर पड़ता है। बच्चों और किशोरों को नशे से दूर रखना भी उनके स्वस्थ भविष्य के लिए जरूरी है। नर्मदापुरम पुलिस के साथ हमारा प्रयास इन जरूरतों को एक साथ संबोधित करने का है। हम इस सहयोग का दायरा बढ़ाकर जिले के अधिक ग्रामीण और आदिवासी स्कूलों तथा अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचना चाहते हैं।”
आईआरएस अधिकारी एवं अपर आयकर आयुक्त डॉ. मेघा भार्गव ने कहा,“बच्चों को सही उम्र में सही जानकारी देना उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है। मासिक धर्म स्वच्छता, बालिका सुरक्षा और नशामुक्ति जैसे विषयों पर स्कूल स्तर पर लगातार जागरूकता होनी चाहिए। बच्चों को यह समझना जरूरी है कि नशे से दूरी उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। पुलिस और सामाजिक संस्थाओं का इस तरह साथ मिलकर काम करना इन संदेशों को बच्चों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद करता है।”
नर्मदापुरम के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहा अभियान
नर्मदापुरम जिले में यह पहल पिछले कुछ समय से चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। केसला, बाबई और नर्मदापुरम के शहरी क्षेत्र सहित विभिन्न स्थानों के स्कूलों में अब तक समर्पण के सहयोग से लगभग 2,500 बच्चों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं एवं जागरूकता पहुंचाई जा चुकी है। आने वाले दिनों में इस अभियान का विस्तार जिले के अन्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों तक किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक बच्चों और किशोरियों को शिक्षा सामग्री, मासिक धर्म स्वच्छता तथा सुरक्षा संबंधी जानकारी और सहयोग मिल सके। शिक्षा सामग्री से लेकर मासिक धर्म स्वच्छता, महिला एवं बाल सुरक्षा और नशामुक्ति जागरूकता तक, नर्मदापुरम पुलिस की यह पहल सामुदायिक पुलिसिंग को गांवों और स्कूलों तक पहुंचाकर बच्चों, विशेषकर बेटियों, के लिए सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण तैयार करने का प्रयास है।
