नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 10 अगस्त 2026 (हिन्द संतरी ) नर्मदापुरम की सड़कों पर रात के सन्नाटे में पसरा दृश्य केवल प्रशासनिक विफलता की कहानी नहीं कहता, बल्कि यह हमारी सामाजिक संवेदनाओं और न्याय व्यवस्था पर भी एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। शहर के प्रमुख मार्गों—मालाखेड़ी रोड, मालाखेड़ी चक्कर रोड, रायपुर रोड, बांद्रा बांध रोड और कुलामड़ी रोड—पर रात ढलते ही बेसहारा गोवंश का जमावड़ा लग जाता है। मुख्य सड़कों पर अंधेरे के बीच बैठे ये मूक प्राणी और अचानक उनके सामने आ जाने से अनियंत्रित होते दुपहिया व चार पहिया वाहन, हर रात किसी न किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं।

विडंबना यह है कि प्रशासनिक अभिलेखों में मध्य प्रदेश गौसंवर्धन Board और स्थानीय निकायों के माध्यम से करोड़ों रुपये का बजट, कैचर वाहन, और सैकड़ों कर्मचारियों का अमला गोवंश प्रबंधन में तैनात दिखाया जाता है। जब पूरे जिले में औसतन 25 से 35 लाख रुपये मासिक और 3 से 4.5 करोड़ रुपये वार्षिक का विशाल बजट प्रबंधन पर व्यय हो रहा है, तब यह यक्ष प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि धरातल पर इन मुख्य मार्गों की स्थिति इतनी दयनीय क्यों है? क्या यह बजट केवल कागजी औपचारिकताओं में खप रहा है या फिर जमीनी अमला अपनी प्राथमिक जिम्मेदारियों से पूरी तरह विमुख हो चुका है?

विधिक दृष्टि से देखें तो भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित जीवन जीने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है, लेकिन सड़कों पर रोज घटित होने वाले 3 से 5 हादसे और उनमें घायल या अकाल मृत्यु के शिकार होते लोग यह दर्शाते हैं कि प्रशासनिक अनदेखी के कारण नागरिकों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। इसके साथ ही, नगर पालिका अधिनियम के तहत सड़कों को बाधामुक्त और सुरक्षित रखना स्थानीय प्रशासन का वैधानिक दायित्व है, जिसका निर्वहन न होना ‘सिविल लापरवाही’ की श्रेणी में आता है। दूसरी ओर, मच्छर काटने, बीमारियों से ग्रस्त होने और वाहनों की टक्कर से लहूलुहान होकर दम तोड़ने वाले मवेशियों की स्थिति ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’ के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है।

एक न्यायसंगत और संवेदनशील व्यवस्था में इंसानी जान और मूक पशुधन दोनों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि नगर पालिका प्रशासन का स्वास्थ्य अमला और पशु चिकित्सा विभाग का निगरानी तंत्र अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाए, तो स्थिति में तत्काल सुधार संभव है। आवश्यकता इस बात की है कि मुख्य अधिकारी (CMO) और उपसंचालक स्तर के अधिकारी केवल कागजी निरीक्षणों तक सीमित न रहकर रात्रि गश्त बढ़ाएं, कैचर वाहनों की कार्यप्रणाली सुनिश्चित करें और पकड़े गए गोवंश को रामजीबाबा व अन्य पंजीकृत गौशालाओं में सुरक्षित पुनर्वासित कराएं। नर्मदापुरम की पावन धरा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन को अब अपनी निद्रा त्यागकर ठोस और स्थायी कदम उठाने ही होंगे।
