आत्माराम यादव
नर्मदापुरम 22,अप्रैल,2026/ एफक्यू गुणवत्तापूर्ण गेहूं का नियम उसी दिन बना जब से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू हुई तभी से सभी समिति इस नियम का पालन पर उपार्जन कार्य करती रही किन्तु बाद में नेताओं के दबाव में सरकार ने मिट्टी, कचरा, कुसी भरा गेहूं खरीदने समितियों को मजबूर किया ओर उन्होने खरीदा तभी से समर्थन मूल्य पर गेहूं धान, मूंग खरीदी में एफक्यू क्वालिटी के बीच भ्रष्टाचार घुस गया ओर समितियों के माध्यम से मानिटरिंग करने वाले अधिकारियों ने अपनी ज़िम्मेदारी पूरी न कर सरकार को करोड़ो रुपए का कचरयुक्त गेहूं खरीदवा दिया , इस साल फिर यही नियम अपने असली रूप में आ गया तब किसानों का गुस्सा सातवे आसमान पर है।
कलेक्टर सोमेश मिश्रा के पूर्व अगर वर्ष 2009 से 2018 तक के कलेक्टर निशांत बरबड़े, राहुल जैन ,संकेत भोंडवे, अभिनाश लवानिया का कार्यकाल देखे तो इनके द्वारा एफक्यू क्वालिटी की सख्ती ओर कार्यवाही करने में कोताही नही की बाबजूद इसी दरम्यान खरीदी में एफक्यू क्वालिटी के पालन न करने से करोड़ो का घोटाला भी इनके द्वारा उजागर किया ओर सरकार को पत्राचार किया लेकिन जैसे ही कलेक्टर प्रियंका दास आई तो उनका कार्यकाल 7 महीने होने से वे खरीदी नहीं देख पाई किन्तु इनके बाद आशीष सक्सेना, शीलेन्द्र सिंह धनंजय सिंह ,नीरज कुमार ओर सुश्री सोनिया मीना के कार्यकाल में उपार्जन समिति की बैठकों में गेहूं खरीदी व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए पर मानिटरिंग करने वाले अधिकारियों ने इसका पालन नही कराया।
हाल ही में फिर कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देशन में बैठक में उपस्थित सभी उपार्जन समिति सदस्यों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया कि केवल एफएक्यू (FAQ) गुणवत्ता का गेहूं ही खरीदा जाए तथा मिट्टी या अन्य फॉरेन मटेरियल युक्त गेहूं की खरीदी किसी भी स्थिति में न की जाए। कलेक्टर श्री मिश्रा ने सभी अधिकारियों को खरीदी केंद्रों का नियमित एवं सतत निरीक्षण करने के निर्देश दिए, ताकि खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी एवं व्यवस्थित रूप से संचालित हो सके। इस बैठक में बैठक जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन, डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी आपूर्ति अधिकारी श्रीमती नीता कोरी, उपसंचालक कृषि रविकांत सिंह, एवं जिला उपार्जन समिति के अन्य सदस्य अधिकारी गण उपस्थित रहे, किन्तु यक्ष प्रश्न यही खड़ा हो जाता आई की बंद कमरे में एसी के शीतलता में लिया गया इनका निर्णय फिलहाल किसानों को कोई शीतलता नेही देने वाला है, बल्कि उनकी परेशानी खड़ी करने वाला है । कलेक्टर तो सरकार का हुक्म बजा रहे है ओर सरकार किसानों की उपज न खरीदने का मन बनाकर इन किसानों को खून के आँसू रुला रही है ,किसान संगठनों के द्वारा खरीदी के दौरान किसानों की की समस्याओं पर चुप्पी भी सरकारी हो गई है ।
