नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 05 सितम्बर 2026 (हिन्द संतरी )भोपाल के पत्रकार एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी विचित्र कुमार सिन्हाजी की 5 सितम्बर 1995 में हमीदिया रोड राजदूत होटल के सामने दुर्गामंदिर के पास सड़क दुर्घटना में हुई दर्दनाक मृत्यु के बाद पिता के साहित्यक्षेत्र के पदचिन्हों पर कदम रख वकालत का कारोबार से पत्रकारिता के क्षेत्र में पदार्पण किया ओर नर्मदापुरम से दैनिक क्षितिज किरण समाचार का प्रकाशन शुरू कर कृष्णकान्त सक्सेना ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाया । पहली बार प्रदेश की राजधानी भोपाल में राजभवन से रवीन्द्र भवन तक के मार्ग का नाम विचित्रकुमार सिन्हा मार्ग करवाकर अपने पिता को सच्ची श्रद्धांजलि दी । चुकी भोपाल में स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाले 305 स्वतंत्रता सेनानियों के आजादी के योगदान का प्रस्तुतीकरण करने वाले किसी भी स्वजातीय नेता, समाज वह काम नहीं कर सका जिसे कृष्णकांत सक्सेना जी ने भोपाल में कारगार कर अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पिता का यह स्थान दिलाया ओर राजभवन से रवीन्द्र भवन का मार्ग उनके नाम करवाकर उन्हे राजधानी की इस सड़क पर आने जाने वालों की स्मृतिपटल पर अंकित कर अजर अमर कर दिय।
भोपाल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री विचित्र कुमार सिन्हा जी के नाम से भोपाल राजधानी में सड़क होने के बाद नर्मदापुरम जिले के 267 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में अकेले माखनलाल चतुर्वेदी जी को छोड़ दिया जाये तो किसी के भी नाम न तो सड़क है, न किसी अस्पताल, चौराहे, खेल मैदान आदि का नाम किया गया ओर ऐसी मांगों को साकार करने में किसी भी राजनैतिक दल , सांसद विधायक की श्रद्धा जागी हो यह भी किसी को पता नहीं किन्तु भोपाल से नर्मदापुरम में पत्रकारिता कर दैनिक क्षितिज किरण का प्रकाशन करने वाले उनके सुपुत्र ने अपने पिता को अब नर्मदापुरम में उनकी पुण्य स्मृति में 5 सितंबर को नर्मदा महाविद्यालय के कॉन्फ्रेंस सभागार में स्मृति समारोह आयोजित कर नर्मदा महाविद्यालय के सामने से सर्किट हाउस तक के मार्ग का नामकरण ‘विचित्र कुमार सिन्हा मार्ग’ कर नाम पट्टिका का लोकार्पण स्थानीय विधायक डॉ सीताशरण शर्म, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमति नीतू महेंद्र यादव व अतिथियों से करवा कर सम्मान दिलाकर अपने पुत्र होने धर्म का पालन किया है।

नर्मदापुरम के 267 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को योगदान को भी याद किया जाना चाहिए ओर उनके नाम से शहर की सड़कों, गलियों, चौराहों ओर ग्रामों के नाम किए जाने का उत्साह अब इनसे जुड़े लोगों में जीवंत होना चाहिए ।जिले की बात न कर अगर होशंगाबाद /नर्मदापुरम के स्वतंत्रता सेनानी की बात की जाये तो उनमें ओंकारप्रसाद गंगाप्रसाद मिश्रा,सैयद अहमद सैयद ईसाक, सुकुमार पगारे, श्रीमति सरसपगारे, अर्जुन सिंह सुंदरदास, अश्विनीकुमार शंभुदयाल मिश्रा, सुरेशचंद पननलाल बरगले,दुर्गाप्रसाद महावीर प्रसाद जैसवाल ,शंभुदयाल नारायण प्रसाद, हजारीलाल परमानंद मस्ते, हरगोविंद बाबूलाल सीठा, धन्नालाल बाबूलाल सीठा,सज्जाद अली, मथुरा प्रसाद ब्राम्हण, चैतन्य कुमार नंदकिशोर निगम, नन्हेलाल भूरेलाल अब्दुल राऊफ ,रणजीतसिंह सूरतसिंह,निर्मलकुमार बाबूलाल जैन, नारायण दास झुन्नीलल , विजयकुमार दिलीप चंद,सैयद याक़ूब अली वे नाम है जो नर्मदापुरम की माटी से है शेष अन्य नामों में जिले की तहसील एवं ग्रामों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी है जिनके योगदान को बी भुलाया नहीं जा सकता है ओर उन्हे भए अगर हम कुछ भी पहचान देते है तो वह उनके योगदान में राई के समान है,
इसी पहचान देने की परंपरा में पुत्र के आगे आने से भोपाल जिले की रियासत से हटकर होशंगाबाद जिले में स्थान प्राप्त हयो सका है ओर इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं नर्मदापुरम विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने कहा कि जीवन में कृतज्ञता का विशेष महत्व है। स्व. विचित्र कुमार सिन्हा ने स्वतंत्रता आंदोलन में देश के लिए जो योगदान दिया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके नाम पर मार्ग का नामकरण किया जाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि सिन्हा जी ने देश और समाज के लिए जो कार्य किए, उनके मुकाबले यह सम्मान बहुत छोटा है। उनके पुत्र के.के. सक्सेना एवं पौत्र श्री विलक्षण सक्सेना द्वारा उनकी स्मृतियों को संजोने का कार्य समाज के लिए अनुकरणीय पहल है। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू महेंद्र यादव ने की। उन्होंने कहा कि आज शिक्षक दिवस है और पत्रकार भी गुरू के समान होते हैं। स्व. विचित्र कुमार सिन्हा का स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके सम्मान में नर्मदा महाविद्यालय से सर्किट हाउस तक का मार्ग अब ‘विचित्र कुमार सिन्हा मार्ग’ के नाम से जाना जाएगा। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में जनपद अध्यक्ष भूपेंद्र यादव, नगर पालिका उपाध्यक्ष अभय वर्मा, भोपाल से आए स्व. सिन्हा जी के परिजन, नर्मदा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राम कुमार चौकसे, महाविद्यालय के प्रोफेसर एवं विद्यार्थी, शहर के साहित्यकार, पत्रकार, कायस्थ समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सदस्य सहित अनेक नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजन समिति के सदस्यों की स्थिति भीष्मपितामह के समान रही है जैसे पितामह हस्तिनापुर से बंधे थे वैसे ही यहा देखने को मिला । समारोह के दौरान विचित्र कुमार सिन्हा स्मृति समारोह समिति के कार्यकारिणी सदस्यों का अतिथियों द्वारा सम्मान किया गया। वहीं आयोजन समिति की ओर से अतिथियों का शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन विलक्षण सक्सेना ने किया। स्वागत भाषण बलराम शर्मा ने दिया तथा आभार प्रदर्शन अभय वर्मा ने किया कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
