रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण इस उद्देश्य से किया जा रहा था कि शहर के भीतर ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म हो सके लेकिन वर्तमान स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। फाटक बंद होते ही दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और यात्रियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि निर्माण स्थल से उड़ती धूल और अव्यवस्थित कार्य के कारण उनका व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई है और दुकानों की सफाई में ही पूरा दिन निकल जाता है।
बारिश के मौसम को देखते हुए स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि क्षेत्र में जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है। यदि समय पर निर्माण पूरा नहीं हुआ तो जलभराव और कीचड़ की समस्या और बढ़ सकती है जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें दोगुनी हो जाएंगी।
वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें निर्माणाधीन क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। यहां से गुजरते समय क्रॉस ट्रैफिक और संकरी सड़क के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है। आसपास के क्षेत्रों जैसे करेली, छिंदवाड़ा, सिवनी, जबलपुर और गोटेगांव से आने वाले वाहन भी इसी मार्ग से शहर में प्रवेश करते हैं जिससे दबाव और बढ़ जाता है।
रात के समय स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है क्योंकि निर्माण स्थल पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से अंधेरा छा जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का डर भी बढ़ जाता है और खासकर दोपहिया वाहन चालकों में असुरक्षा का माहौल रहता है।
सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य बीच में श्रमिकों की कमी के कारण रुक गया था और बाद में शुरू तो हुआ लेकिन गति अभी भी धीमी है। अधिकारी भी कार्य पूरा होने की निश्चित समय सीमा बताने में असमर्थ हैं जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों की मांग है कि इस ओवरब्रिज निर्माण कार्य को तेजी से पूरा किया जाए ताकि यातायात व्यवस्था सामान्य हो सके और आगामी बारिश में होने वाली संभावित समस्याओं से राहत मिल सके।
