जानकारी के अनुसार जटकरा गांव का रहने वाला यह बच्चा साइकिल चलाते समय गिर गया था जिससे उसे हल्की चोट आई थी। परिवार वाले उसे इलाज के लिए सेवाग्राम स्थित एक निजी क्लिनिक ले गए जहां सामान्य प्राथमिक उपचार किया जा रहा था। परिजनों का कहना है कि स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं थी और बच्चा सामान्य रूप से बात कर रहा था।
आरोप है कि इलाज के दौरान क्लिनिक संचालक ने बच्चे को एक इंजेक्शन लगाया जिसके तुरंत बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ने लगी। बच्चे के दादा राजू पटेल के मुताबिक इंजेक्शन लगते ही उसे बेचैनी महसूस होने लगी और कुछ ही मिनटों में उसकी तबीयत इतनी खराब हो गई कि उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और परिजन इसे सीधे तौर पर मेडिकल लापरवाही बता रहे हैं।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए राजनगर स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा।
इस घटना के बाद इलाके में लोगों के बीच गुस्सा और डर दोनों देखने को मिल रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या निजी क्लिनिक में इलाज के दौरान जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं या नहीं। अगर परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही का उदाहरण बन सकता है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और क्लिनिक से जुड़े दस्तावेजों और इलाज की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है। वहीं परिवार न्याय की मांग कर रहा है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि मामूली दिखने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में भी सही और सुरक्षित इलाज कितना जरूरी है। एक छोटी सी लापरवाही किसी परिवार के लिए जीवन भर का दर्द बन सकती है।
