ट्विशा के परिवार की ओर से अधिवक्ता अंकुर पांडे ने कोर्ट में आवेदन देकर CDR सुरक्षित रखने की मांग की है, जबकि आरोपी पक्ष की ओर से सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का आवेदन दायर किया गया है। दोनों पक्षों की दलीलों पर मंगलवार को सुनवाई प्रस्तावित है, जिसमें कोर्ट रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को संरक्षित करने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी कर सकता है।
इस बीच, सीबीआई ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सोमवार को कटारा हिल्स थाने में दर्ज एफआईआर को री-रजिस्टर कर दिया है। अब इस केस में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने अपनी जांच में दहेज के रूप में 20 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग के आरोपों को आधार बनाया है।
सोमवार देर शाम सीबीआई की टीम भोपाल पहुंची और जांच को तेज कर दिया। एजेंसी ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ पूछताछ शुरू की और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी जुटाई। इसी दौरान SIT की टीम ने भी समर्थ सिंह के घर पहुंचकर करीब ढाई घंटे तक पूछताछ की और स्पॉट वेरिफिकेशन कराया।
जांच के दौरान समर्थ सिंह ने पुलिस को बताया कि ट्विशा गर्भपात के बाद मानसिक तनाव में थी। हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, मामले को प्रभावित करने की कोशिश की गई और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है।
इसी बीच, एक अहम विवाद उस बेल्ट को लेकर भी सामने आया है, जिसे कथित तौर पर फांसी लगाने में इस्तेमाल किया गया था। डीसीपी विकास कुमार शहवाल ने स्पष्ट किया कि जिमनास्टिक बेल्ट को पहले ही 7 दिन पूर्व सागर FSL लैब भेजा जा चुका है और उसकी जांच प्रक्रिया जारी है।
मामले में यह भी सामने आया है कि पुलिस को सूचना देने में देरी हुई थी, जिसकी जांच अब सीबीआई कर रही है। आरोप है कि अस्पताल में मृत्यु की पुष्टि के बाद भी समय पर पुलिस को सूचना नहीं दी गई, जिससे केस के शुरुआती साक्ष्यों पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ट्विशा की मौत 12 मई की रात कथित तौर पर फांसी लगाने से हुई थी, जबकि 13 मई की सुबह मामला दर्ज किया गया। इस देरी को लेकर भी जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और संबंधित डॉक्टरों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए टिप्पणी की है और मीडिया को संवेदनशीलता बरतने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखा जाए और जांच को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ने दिया जाए। अब सभी की नजरें भोपाल कोर्ट की आज होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां CDR और CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने को लेकर अहम फैसला आ सकता है।
