आत्माराम यादव चीफ एडिटर
14 अगस्त 2026 को असमय मृत्यु को प्राप्त हुए डॉ दशरथ मसानिया जैसा व्यक्तित्व सदियों में जन्म लेता है। 500 से अधिक चालीसा लिखने, स्वच्छता पर दोहे, संस्कृत, गणित को अपने नवाचार के सूर्योदय से रोशन कर उसे गायन के प्रयोग से सरल कर देशभर के बच्चों पर उपकार किया। उनकी सेवाओं के लिए उन्हे कई स्थानों से श्रेष्ठ सम्मानों से सम्मानित किया गया ऐसे शिक्षक डॉ मसानिया का असमय देहांत हो जाना बेहद दुखद है तथा साहित्य और शिक्षा जगत के लिए अपूर्ण क्षति है। आज उनके जीवन की स्मृति में ही हमारी धरोहर रह गई है, मेरा डॉ मसानिया से मई 1995 में संपर्क हुआ जब होशंगाबाद से मेरे द्वारा ग्वाल समाज की पत्रिका सारथी का प्रकाशन शुरू किया तब वे ग्वाल महिमा पत्रिका के संपादक हुआ करते थे। उनकी कुछ यादें ताजा कर उनके न रहने के दुख को विस्मरण कर रहा हूँ, संभवतः आप भी उनके करीबी रहे हो तो आप इसमें शामिल हो सकते है।
डॉ मसानिया के अब तक के लिखे गए साहित्य से परिचय कराकर उन्हे सच्ची श्रद्धान्जली देना चाहता हूँ ताकि आप सभी डॉ मसानी से दिल से जुड़कर उनकी लेखनी से भी भिग्य हो सके। डॉ मसानी का सबसे बड़ा ओर प्रमुख लेखन जो दुर्लभ है वह था हिन्दी साहित्य का इतिहास, जिसे उन्होने मात्र सरल,सहज 100 दोहों में समेट कर उस इतिहास का लेखन किया जो सर्वप्रथम हिन्दी साहित्य का इतिहास लेखन फ्रांसीसी विद्वान गार्सा द तासी ने सन् 1839 मे किया था। इसके बाद शिवराज सिंह सेंगर, जार्ज ग्रियर्सन , मिश्र बन्धु आदि ने लिखा। सन् 1929 में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने ‘हिन्दी का इतिहास ‘ लिखकर इसे चार भागों में बांटा जो छात्रों , शिक्षकों तथा हिन्दी प्रेमियों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ । इसी इतिहास को आधार बनाकर डॉ मसानिया ने मात्र 100 दोहों में समेट कर गायन नवाचार के रुप मे प्रस्तुत किया है जो आज छात्र छात्राओं के लिए ही नहीं वरन् शिक्षकों के लिए वरदान बन गया है यह संग्रहणीय और पठनीय भी है ओर विभिन्न प्रतियोगता में भी परीक्षा में उपयोगी सिद्ध हुआ है ।
सर्व प्रथम मूल 62 दोहे हिन्दी दिवस 2014 में प्रकाशित हुए जिन्हे कईं पत्र पत्रिकाओं मे स्थान दिया गया । आदिकाल के ,भक्तिकाल व रीतिकाल, 20-20 तथा आधुनिक काल के 40 दोहे प्रेरणादायी , सार्थक,संक्षिप्त तथा सूत्रबद्ध है जिन्हें गाकर भी आसानी समझा जा सकता है । उदाहरण के लिए 4 रामभक्त कवियों के नाम भक्तमाल नाभा लिख , हृदयराम हनुमान । अग्रदास की मंजरी, रामायण चौहान ।। 8 कृष्ण भक्त कवियों के नाम – कृष्ण चतुर परमानंद, गोविन्द कुंभनदास । सूर नंद अरु छीत कवि,अष्ट छाप के खास।। 6 सूफी कवियों के नाम कुतुबन मंझन जायसी, नूर शेख उसमान। प्रेममार्ग सूफी कवि, कहते कवि मसान ।। रामानंद के 12 ज्ञानमार्गीय शिष्यों के नाम एक दोहे में सुखा अनंता सुरसुरा, भावा हरया पूर। कबीर अन्ना सेन रवि, पीपा पद्मा सूर।।
इसी प्रकार आधुनिक काल को भागों में (भारतेन्दु युग, द्विवेदी, छायावादी, प्रगतिवादी,प्रयोगवादी और नई कविता) बाँटकर कवि और उनके कृतित्व का बोध कराया गया है । चार तार सप्तक को चार दोहे में पिरोकर 7 – 7 कवियों के नाम सूत्रबद्ध है । संक्षेप में कहा जा सकता है छात्रों को सिखाने के लिए डाॅ मसानिया के दोहे हिन्दी जगत में गागर में सागर भर रहें हैं । इन दोहों को आप ‘हिन्दी दोहावली‘ मे पढ सकते है। इन्हें शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए और छात्र हित में पाठ्यक्रम में भी जोड़ा जा सकता है।
मुझे स्मरण है आगर के तत्कालीन कलेक्टर डी.व्ही.सिंह ने 26 सितंबर 2017 को डॉ दशरथ मसानिया की प्रशंसा में उनके द्वारा ‘ स्वच्छ भारत अभियान‘ के तहत लिखे कुछ दोहे गायन मे शामिल करने के साथ स्कूलों की दीवारों पर लिखवा कर लोगों को प्रेरित कर करने के अभियान की शुरुआत की तब डॉ मसानिया के दोहे पूरे प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में स्वच्छता की अलख जगाने में कारगर हुये, उसी समय उनकी “बेटी चिरईया” की धूम मची हुई थी और उनकी लेखनी को सम्मान देने के लिए होशंगाबाद की संस्था जो जगतगुरु से कथावाचक प्रदीप मिश्रा, धर्माचार्य सोमेश परसाई आदि शतादिक देश के साहित्यकारों को सम्मानित कर चुकी थी के द्वारा डॉ दशरथ मसानिया जी को भी उनके अब तक के सेवाओं को लेकर सम्मानित किया गया, जिसका साक्षी बनने का सौभाग्य मुझे भी प्राप्त हुआ। यूं तो उन्हे प्रदेश सरकार ने, राज्यपाल महोदय ने सम्मानित कर उनका ही नहीं बल्कि ग्वाल समाज का गौरव बढ़ाया वही हिंदी रक्षक अंतर्राष्ट्रीय सम्मान समारोह 2024 मंच की अमेरिका शाखा, लंदन शाखा एवं दिव्योत्थान एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में 22 दिसंबर 2024 गणित दिवस पर मध्य भारत हिन्दी साहित्य समिति सभागृह इंदौर में लंदन से आई मुख्य अतिथि श्रीमती माधवी ने हिन्दी भाषा की प्रशंसा करते हुए कहा कि डॉ मसानिया विगत 30 वर्षों से हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए शिक्षा जगत मे कार्य कर सबसे अधिक चालीसा लिखकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर चुके है। हिन्दी को 230 दोहों में समेट कर व्याकरण, गद्य पद्य, रस छंद अलंकार को गायन शोध के रूप में प्रस्तुत कर अद्भुत कार्य किया है।
डॉ दसरथ मसानी की महानता उनके हिन्दी साहित्य में किसी गुणविशेष की अतिशयता में प्रकट करने से देखी जा सकती है जिसमें उनके विविध और अनेक गुणों के संविकास की जीवन-शक्ति के दर्शन होते है। आदरणीय डॉ दसरथ मसानी के जीवन में उनके द्वारा किए गए कार्यों व लेखन अनेक गुणों का समुच्चय है। उनके भीतर मातृभाषा हिन्दी के अलावा संस्कृत, गणित तो हिलोरे ले रहा था वही धर्म, परंपरा, रीति रिवाज ओर हमारे कुलदेवी देवताओं के पार्टी उनमें प्रेम का प्रवाह सागर रहा है जिसके स्रोत से नवाचार के रूप में चालीसा की फुहारें होती रही है। उनका हृदय उनके शरीर के समान ही विशाल और गहन है जिस में साथियों के अलावा अपनी तीन बेटियों के सपनों के आकाश को वे ऊंचाइया देते रहे, अभी चार माह पूर्व ही नर्मदापुरम में वे अपनी धर्मपत्नी के साथ आए ओर समाजजन से भेंट कर कुछ समय के लिए मेरे निवास पर भी रहे यह उनकी अनोखी निकटता सभी समाजजन के प्रति रही है। उन्हें साहित्य में रस है। संगीत से प्रेम है। जो नवीन विचारों को लयवद्ध कर अपनी माटी-अपनी मातृभूमि के प्रति उनका अथाह प्रखरता उनके शब्दों में उनके चालीसा में, उनके दोहे में दिखाई देती है। साथ ही वे अपने छात्रों में सीमाओं में नहीं बंधे बल्कि समूचे देश के बच्चों को अपना छात्र समझकर अपने लेखन वृहद ओर उत्कृष्ट कर जन-सेवा और जन-कल्याण को अपनाते रहे, इतना सबकुछ लिखने के बाद भी उनकी ज्ञानपिपासा बुझने का नाम नही लेती ओर विचार आग में घी का काम करते खुद के सुख के लिए लिखते पर उनका लिखा कभी व्यक्तिगत न हो सका ओर लेखनी के कमान पर चढ़कर प्रखर हो लोकप्रिय बंता गया।
हिन्दी भाषा की डॉ मसानी ने जीवनभर सेवा की है। हिन्दी साहित्य जगत में उनका लिखा एक समाज का मार्गदर्शन बनेगा इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है । मालवांचल में आगर की माटी के इस दीपक डॉ मसानी का हिन्दी की प्रगति के लिए किया ज्ञ परिश्रम अनूठा है, जिसका लाभ भविष्य में सभी को प्राप्त होगा। ग्वाल समाज को गौरवान्वित कर मध्यप्रदेश में हिन्दी-प्रेम की अलख जगा कर हिन्दी भाषा के क्षेत्र में व्यापक सेवा के नाते यदि किसी का सर्व प्रथम स्थान चुना जाएगा तो वह आदरणीय डॉ दसरथ मसानी का होगा जिन्हें इंदौर में को जीवन पर्यन्त साहित्य सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। मित्र आप का इस जगत से चले जाना अत्यंत क्लांत किए हुए किन्तु जो मुझे ज्ञात है उसका एक पार्ट यहा प्रस्तुत कर, आपकी आत्मा की शांति हेतु अपनी शब्दांजली भेंट कर रहा हूँ ताकि आपको गोलोक में राधा रानी की शरण प्राप्त हो ।
