अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विद्यार्थियों को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहन सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। हाल के वर्षों में स्कूल वाहनों से जुड़े हादसों को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। यही वजह है कि नए सत्र के पहले ही सप्ताह में सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा शुरू कर दी गई है।
मोहन नगर चौराहे पर आयोजित इस विशेष जांच अभियान में ट्रैफिक डीएसपी विक्रम कनपुरिया, डीएसपी दिलीप परिहार और यातायात थाना प्रभारी सूबेदार इंद्रपाल सिंह सहित पुलिस अधिकारियों की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने एक-एक वाहन की बारीकी से जांच कर सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं का परीक्षण किया।
जांच के दौरान स्कूल बसों की फिटनेस को विशेष रूप से परखा गया। साथ ही यह भी देखा गया कि वाहन के पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। इसके अलावा अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, आपातकालीन निकास द्वार, स्पीड गवर्नर और सीसीटीवी कैमरों जैसी जरूरी सुरक्षा सुविधाओं की भी जांच की गई। अधिकारियों ने वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, अनुभव और परिचालकों की उपलब्धता की भी जानकारी ली।
यातायात डीएसपी दिलीप परिहार ने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह अभियान चलाया गया है। स्कूल वाहन संचालकों और प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी परिस्थिति में सुरक्षा नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा। जिन वाहनों में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं, उन्हें तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने स्कूल संचालकों को यह भी समझाया कि बच्चों के परिवहन में उपयोग होने वाले वाहनों का नियमित रखरखाव और समय-समय पर तकनीकी परीक्षण बेहद आवश्यक है। छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है, इसलिए सभी सुरक्षा उपकरण हमेशा कार्यशील स्थिति में रहने चाहिए।
यातायात पुलिस ने साफ किया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि आगे भी लगातार जारी रहेगा। समय-समय पर स्कूल बसों और छात्र परिवहन वाहनों की जांच की जाएगी ताकि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। पुलिस का मानना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षित यात्रा केवल प्रशासन की ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन, वाहन संचालकों और अभिभावकों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ शुरू हुआ यह अभियान स्कूल परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल वाहन संचालकों में जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि अभिभावकों को भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिक भरोसा मिलेगा।
