सूत्रों के अनुसार इस छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने वर्कशॉप से मोबाइल डाटा हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव जैसे अहम डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं जिनकी जांच के आधार पर बड़े वित्तीय अनियमितताओं के खुलासे की आशंका जताई जा रही है बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश इंटेलिजेंस की टीम द्वारा की गई जो विशेष रूप से सेंट्रल कमांड इलाहाबाद से जबलपुर पहुंची थी
मामले की शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि आर्मी वर्कशॉप में उपयोग होने वाले कलपुर्जों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं आशंका है कि मेंटेनेंस कार्यों के दौरान घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और इसके नाम पर करोड़ों रुपए की हेराफेरी की गई जानकारी के मुताबिक देशभर की कई आर्टिलरी गनों को मेंटेनेंस और रिपेयर के लिए इसी वर्कशॉप में लाया जाता है ऐसे में यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ बेहद संवेदनशील रूप ले सकता है
जांच एजेंसियों को कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के संकेत भी मिले हैं बताया जा रहा है कि हेराफेरी की रकम को सीधे कर्मचारियों के पारिवारिक सदस्यों के खातों में ट्रांसफर किए जाने की भी आशंका है इसी आधार पर इंटेलिजेंस टीम ने कई बैंकिंग और ट्रांजेक्शन से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है
इस पूरे मामले में कुछ अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है और उन पर भी नजर रखी जा रही है जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित घोटाले का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें किन किन लोगों की संलिप्तता हो सकती है
फिलहाल कस्टडी में लिए गए दोनों कर्मचारियों से लगातार पूछताछ जारी है और उनसे मिले इनपुट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी इंटेलिजेंस एजेंसियां इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही हैं क्योंकि यह न केवल आर्थिक अनियमितता का मामला है बल्कि इससे सेना की कार्यप्रणाली और उपकरणों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं
जबलपुर की इस आर्मी वर्कशॉप में हुई यह छापेमारी अब एक बड़े खुलासे की ओर इशारा कर रही है आने वाले समय में जांच के नतीजे और भी चौंकाने वाले हो सकते हैं फिलहाल पूरे मामले पर सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नजर बनी हुई है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त न करने के संकेत साफ तौर पर दिए जा रहे हैं
