रिपोर्ट्स के अनुसार, जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौट रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत, खिलाड़ियों और प्रशंसकों के बीच शोक की भावना फैल गई।
जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में रहे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई। अपने करियर के दौरान उन्होंने चार कॉमनवेल्थ खेलों—1994, 1998, 2002 और 2006—में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुल 15 पदक अपने नाम किए। इनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल रहे। इसके अलावा एशियाई खेलों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को कई महत्वपूर्ण पदक दिलाए।
खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में जुट गए। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। उनकी कोचिंग शैली अनुशासन, तकनीकी दक्षता और कड़े प्रशिक्षण के लिए जानी जाती थी। उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की।
भारतीय स्टार शूटर मनु भाकर की सफलता में भी जसपाल राणा की भूमिका को बेहद अहम माना जाता है। उनकी देखरेख में मनु ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाई। बतौर कोच उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था।
हाल के वर्षों में भी जसपाल राणा भारतीय शूटिंग टीम के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारतीय पिस्टल टीम ने उनके मार्गदर्शन में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। यह उपलब्धि उनकी कोचिंग क्षमता और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे। उनका योगदान हमेशा भारतीय खेल इतिहास में याद रखा जाएगा।
जसपाल राणा का निधन भारतीय शूटिंग समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने समर्पण, उपलब्धियों और मार्गदर्शन से भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक महान खिलाड़ी, सफल कोच और खेल के सच्चे दूत के रूप में हमेशा याद रखेंगी।
