22 वर्षीय जूड बेलिंगहैम अब चार बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने अब तक दो फीफा वर्ल्ड कप और दो यूईएफए यूरो चैंपियनशिप में हिस्सा लिया है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने जर्मनी के प्रतिभाशाली खिलाड़ी जमाल मुसियाला का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। बेलिंगहैम की यह उपलब्धि उनकी निरंतरता, प्रतिभा और कम उम्र में हासिल की गई सफलता का शानदार उदाहरण मानी जा रही है।
क्रोएशिया के खिलाफ मुकाबले में बेलिंगहैम ने न सिर्फ रिकॉर्ड बनाया बल्कि मैदान पर भी अपनी उपयोगिता साबित की। उन्होंने एक शानदार गोल दागा और मिडफील्ड में टीम के खेल को नियंत्रित करते हुए इंग्लैंड की जीत में अहम भूमिका निभाई। कप्तान हैरी केन के दो गोलों के अलावा बेलिंगहैम और मार्कस रैशफोर्ड के गोलों ने इंग्लैंड को 4-2 की मजबूत जीत दिलाई।
बेलिंगहैम का अंतरराष्ट्रीय सफर बेहद कम उम्र में शुरू हुआ था। उन्होंने मात्र 17 साल और 136 दिन की उम्र में इंग्लैंड की सीनियर टीम के लिए डेब्यू किया था। इंग्लैंड के इतिहास में उनसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले सिर्फ दो खिलाड़ी—वेन रूनी और थियो वालकॉट—रहे हैं। इसके बाद उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन से खुद को टीम का अहम हिस्सा बना लिया।
उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट यूरो 2020 था, जहां उन्होंने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद उन्होंने फीफा वर्ल्ड कप 2022, यूरो 2024 और अब फीफा वर्ल्ड कप 2026 में हिस्सा लेकर यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किया। इतनी कम उम्र में चार बड़े टूर्नामेंट खेलने की उपलब्धि इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में वह इंग्लैंड फुटबॉल के सबसे बड़े चेहरों में से एक बन सकते हैं।
मैच के बाद बेलिंगहैम ने कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है और हर बार इंग्लैंड की जर्सी पहनते समय वह अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है और वह मैदान पर उतरते ही पूरी ऊर्जा के साथ खेलते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह सीजन काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन बड़े मैचों में टीम के लिए योगदान देना हमेशा उनकी प्राथमिकता रही है।
चार बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय खिलाड़ियों की सूची में अब जूड बेलिंगहैम शीर्ष पर पहुंच गए हैं। उनके बाद जमाल मुसियाला, पेड्री, जेरेमी डोकू, माइकल ओवेन और लुकास पोडोल्स्की का नाम आता है। यह उपलब्धि न केवल बेलिंगहैम के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि इंग्लैंड फुटबॉल के उज्ज्वल भविष्य का भी संकेत देती है।
