इस वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का संतुलन और ताकत पूरी तरह से बदली हुई नजर आएगी, क्योंकि टीम के दो सबसे बड़े स्तंभ रोहित शर्मा और विराट कोहली की टीम में वापसी हो रही है। ये दोनों ही महान बल्लेबाज टी20 और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और अब अपनी पूरी ऊर्जा सिर्फ एक दिवसीय प्रारूप में भारत को जीत दिलाने में लगा रहे हैं। इंग्लैंड की मुश्किल और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इन दोनों सीनियर खिलाड़ियों का लंबा अनुभव भारतीय बल्लेबाजी क्रम को वो मजबूती प्रदान करेगा, जिसकी टी20 सीरीज के दौरान भारी कमी महसूस की गई थी।
टी20 सीरीज के आखिरी मुकाबले में साउथेम्प्टन के मैदान पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर क्लास ली थी और जोस बटलर के धुआंधार 131 रनों की बदौलत 257 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था, जिसके जवाब में भारतीय टीम दबाव नहीं झेल सकी और 56 रनों से मैच हार गई। लगातार दो टी20 सीरीज गंवाने के बाद भारतीय टीम की रणनीतियों पर तीखे सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में वनडे सीरीज में कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में रोहित शर्मा नई गेंद के खिलाफ आक्रामक शुरुआत देने की जिम्मेदारी संभालेंगे, तो वहीं विराट कोहली मध्यक्रम में पारी को स्थिरता और मजबूती देंगे।
भारतीय टीम के लिए एक और बड़ी राहत की बात स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की वापसी है। टी20 सीरीज के दौरान भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण पूरी तरह से बेअसर रहा था और रन्स रोकने में नाकाम साबित हुआ था। बुमराह के आने से टीम को शुरुआती ओवरों में विकेट निकालने की क्षमता मिलेगी और साथ ही डेथ ओवरों में विपक्षी बल्लेबाजों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। बुमराह के साथ कुलदीप यादव, अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे स्पिनर्स मिलकर इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम को रोकने की रणनीति तैयार करेंगे।
यह वनडे सीरीज भारतीय टीम के लिए केवल एक ट्रॉफी जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि पिछले कुछ हफ्तों में लगातार मिली हार के कारण ड्रेसिंग रूम के गिरे हुए मनोबल और खोए हुए आत्मविश्वास को वापस पाने का एक बड़ा मंच भी है। भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और उपकप्तान श्रेयस अय्यर पर भी इस सीरीज के जरिए टीम संयोजन को सही करने का भारी दबाव होगा। भारत और इंग्लैंड के बीच इस हाई-वोल्टेज वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 14 जुलाई को बर्मिंघम के प्रतिष्ठित एजबेस्टन मैदान पर खेला जाएगा।
