जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता किसानों की समस्याओं को लेकर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान प्रदर्शन उग्र हो गया और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश कर गए। प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने वाले इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने बाद में पूरे मामले की जांच कर कानूनी कार्रवाई की।
लालघाटी थाना पुलिस ने जिन नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है उनमें कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नरेश्वर प्रताप सिंह, कालापीपल के पूर्व विधायक और राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी, सीताराम पवैया, यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष जयंत रामवीर सिंह सिकरवार, किसान कांग्रेस के अध्यक्ष कमल चौधरी और पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष इरशाद खान सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने खुलकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन सरकार के दबाव में काम कर रहा है और किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों का गेहूं समय पर नहीं खरीद पा रही है और जब कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाती है तो उसके कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं।
कुणाल चौधरी ने तीखे शब्दों में कहा कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है। उन्होंने प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस न तो अंग्रेजों से डरी थी और न ही अब किसी दबाव में आएगी। उन्होंने साफ कहा कि यदि किसानों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए जेल जाना पड़े तो कांग्रेस कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगे।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि किसानों का गेहूं कब खरीदा जाएगा और किसानों पर हो रही वसूली कब बंद होगी। उन्होंने कर्ज माफी और फसल भुगतान जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
इस पूरे मामले के बाद शाजापुर में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। एक ओर प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इसे किसानों की आवाज दबाने की कोशिश बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
