टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद, फोन पर गाली-गलौज का आरोप
पीड़ित नरेंद्र यादव का आरोप है कि उनकी इस टिप्पणी के बाद कुछ लोगों ने नाराजगी जताई। इसके बाद समाज के एक पंच के भाई ईश्वरलाल यादव ने उन्हें फोन कर अपशब्द कहे और समाज छोड़ने तक की बात कही। नरेंद्र यादव का कहना है कि उन्होंने यह पूरी बात समाज के ग्रुप में भी साझा की, लेकिन किसी सदस्य ने उनका समर्थन नहीं किया।
सामाजिक बहिष्कार और निष्कासन का संदेश
आरोप है कि बिना किसी निष्पक्ष बैठक और बिना उनका पक्ष सुने ही समाज के वॉट्सऐप ग्रुप में उनके परिवार को निष्कासित करने का संदेश जारी कर दिया गया। इसके बाद उनके परिवार को गांव के सामाजिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों में शामिल होने से रोक दिया गया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
प्रशासन तक पहुंचा मामला, पहले भी की गई शिकायत
नरेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने पहले भी एसपी कार्यालय में शिकायत दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बाद में समाज की बैठक जरूर हुई, लेकिन उसमें उन्हें शामिल नहीं किया गया। बैठक में केवल चंदे की राशि वापस कर मामले को समाप्त मान लिया गया।
न्याय की मांग और गंभीर आरोप
पीड़ित का आरोप है कि धर्मशाला किराए और चंदे में कथित अनियमितताओं का विरोध करने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
धर्म परिवर्तन की चेतावनी से बढ़ा मामला
नरेंद्र यादव ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और समाज में उनका सम्मान वापस नहीं किया गया, तो वे परिवार सहित धर्म परिवर्तन करने और अदालत जाने पर विचार करेंगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायत को जांच में ले लिया है। अधिकारियों ने कहा है कि पूरे मामले की जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
यह मामला सामाजिक संगठनों में आंतरिक विवाद, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते तनाव और सामाजिक बहिष्कार जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। प्रशासन की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
