पलक ने बताया कि उनकी मां ने कभी भी उनके करियर को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने हमेशा उन्हें अपने फैसले खुद लेने की आजादी दी है। उनके अनुसार, एक कलाकार का सफर व्यक्तिगत होता है और हर इंसान अपनी सोच और अनुभवों के आधार पर अपने लिए रास्ता चुनता है।
उन्होंने कहा कि उनकी और उनकी मां की पीढ़ी और अनुभव पूरी तरह अलग हैं। जिस दौर में उनकी मां ने इंडस्ट्री में काम किया, वह आज के समय से काफी अलग था। इसलिए दोनों की सोच और काम को देखने का नजरिया भी अलग है। इसके बावजूद दोनों के बीच आपसी समझ और सम्मान हमेशा बना रहता है।
पलक के मुताबिक, उनकी मां केवल एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाती हैं। वह उन्हें सुझाव जरूर देती हैं, लेकिन कभी किसी फैसले के लिए मजबूर नहीं करतीं। उन्होंने बताया कि जब भी वह किसी नए प्रोजेक्ट पर विचार करती हैं, तो उनकी मां केवल इतना पूछती हैं कि क्या वह काम उन्हें अंदर से सही महसूस हो रहा है या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां का मानना है कि अभिनय केवल पेशा नहीं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव है। अगर कलाकार किसी किरदार या कहानी से खुद को जोड़ नहीं पाता, तो उसका प्रदर्शन भी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाता। यही वजह है कि उन्हें हमेशा अपने दिल की सुनने की सलाह दी जाती है।
पलक ने स्वीकार किया कि इंडस्ट्री में कदम रखना उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि लोगों की उम्मीदें पहले से ही काफी ज्यादा थीं। लेकिन उन्होंने खुद की पहचान अलग तरीके से बनाने की कोशिश की और हर फैसले को अपनी समझ से लिया।
उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार के लिए आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच बेहद जरूरी होती है। जब इंसान अपने फैसले खुद लेता है, तो वह अपनी सफलता और असफलता दोनों को बेहतर तरीके से समझ पाता है। यही सोच उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देती है।
मां-बेटी के इस रिश्ते की सबसे खास बात यही है कि इसमें भरोसा और स्वतंत्रता दोनों मौजूद हैं। पलक मानती हैं कि परिवार का समर्थन किसी भी कलाकार के लिए बहुत जरूरी होता है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है अपनी पहचान खुद बनाना।
आज पलक तिवारी धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी जगह मजबूत कर रही हैं और उनके विचार यह दिखाते हैं कि वह केवल स्टार किड की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि अपने दम पर एक अलग मुकाम हासिल करना चाहती हैं।
