नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 23,जून,2026(हिन्द संतरी ) राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली द्वारा विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के उपलक्ष्य में 1 जून से 30 जून तक संचालित विशेष अभियान के अंतर्गत मंगलवार को नर्मदापुरम शहर में बाल श्रम की पहचान, रोकथाम एवं विमुक्ति के उद्देश्य से संयुक्त जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान का संचालन श्रम विभाग के नेतृत्व में जिला टास्क फोर्स द्वारा किया गया, जिसमें पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की।

अभियान के दौरान शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर नागरिकों, व्यापारियों एवं प्रतिष्ठान संचालकों को बाल श्रम निषेध संबंधी प्रावधानों की जानकारी दी गई। निरीक्षण के समय स्पष्ट किया गया कि 14 वर्ष तक की आयु के किसी भी बालक को किसी भी प्रकार के व्यवसाय, उद्योग या कार्य में नियोजित करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। साथ ही बताया गया कि 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों को खतरनाक श्रेणी के कार्यों, जैसे खनन, ज्वलनशील पदार्थों, विस्फोटकों तथा अन्य परिसंकटमय प्रक्रियाओं से जुड़े उद्योगों में नियोजित करना कानूनन अपराध है।
श्रम निरीक्षक श्रीमती ज्योति पी.ए. ने बताया कि बालकों का किसी भी संस्थान में नियोजन तथा किशोर श्रमिकों को खतरनाक उद्योगों में कार्य पर लगाना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में दोषी नियोजक के विरुद्ध न्यूनतम छह माह से अधिकतम दो वर्ष तक के कारावास अथवा 20 हजार रुपये से 50 हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
अभियान के दौरान सतरस्ता, बस स्टैंड एवं विभिन्न बाजार क्षेत्रों में स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर बाल श्रम निषेध संबंधी जागरूकता स्टीकर लगाए गए तथा संबंधित अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने में प्रशासन का सहयोग करें तथा कहीं भी बाल श्रम की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित विभाग को सूचित करें।
