नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 22,सितम्बर,2026 (हिन्द संतरी ) प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को मजबूत करना, प्रसंस्करण इकाइयों को तकनीकी सहायता देना एवं उद्यमियों को ऋण, अनुदान तथा प्रशिक्षण प्रदान कर स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। इस योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत उद्यमियों को 35% तक का क्रेडिट लिंक्ड अनुदान भी उपलब्ध कराया जाता है।
नर्मदापुरम जिले के युवा उद्यमी श्री मृत्युंजय रॉय ने मधुमक्खी पालन एवं शहद प्रसंस्करण के क्षेत्र में नवाचार कर स्वरोजगार के नए द्वार खोले हैं। श्री रॉय विगत चार वर्षों से मधुमक्खी पालन का कार्य कर रहे हैं और अब उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत शहद प्रसंस्करण इकाई माधुभूमि नेचुरल प्रोडक्ट्स स्थापित की है। वे बताते हैं कि सन 2020 में पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके सामने नौकरी एवं आत्मनिर्भर बनने के दो रास्ते थे जिसमें से उन्होंने स्वयं का रोजगार स्थापित कर आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना जिसमें उन्हें भारत सरकार की योजना प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद उद्योग उन्नयन योजना के तहत लाभ मिला।
उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से पीएमएफएमई योजनान्तर्गत श्री रॉय को 16 लाख 11 हजार रुपए का ऋण प्रदान किया गया। इसमें शासन की तरफ से उन्हें 35 प्रतिशत तक का अनुदान भी मिला। इस ऋण से उन्होंने अत्याधुनिक प्रसंस्करण इकाई स्थापित कर शुद्ध एवं प्राकृतिक शहद का उत्पादन प्रारंभ किया है। उनकी इकाई में विभिन्न प्रकार के फ्लेवरयुक्त शहद जैसे हिमालयन फॉरेस्ट हनी, मस्टर्ड हनी एवं यूकेलिप्टस हनी भी तैयार किये जा रहे हैं, जो उपभोक्ताओं को शुद्धता एवं गुणवत्ता के साथ उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
श्री मृत्युंजय रॉय ने बताया कि मधुमक्खियों से शहद एकत्रित कर उसे आधुनिक तकनीक से शुद्ध किया जाता है और फिर आकर्षक पैकेजिंग कर विपणन किया जाता है। उनके इस प्रयास से न केवल उन्हें आजीविका का सशक्त साधन मिला है बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए मेंने भी आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना, जिसके लिए मैं प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का धन्यवाद देता हूं। श्री मृत्युंजय रॉय की यह सफलता कहानी जिले के अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार की राह में प्रेरित कर रही है।
