नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 26,अगस्त,2026(हिन्द संतरी ) मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद, नर्मदापुरम एवं नर्मदा समग्र के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को रिवर व्यू परिसर में ‘नर्मदा संवाद’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद माया नारोलिया, विशिष्ट अतीत नीतू महेंद्र यादव उपस्थित रहीं। मुख्य वक्ता के रूप में बृज किशोर भार्गव एवं कार्तिक सप्रे का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यशाला में नर्मदा जलग्रहण क्षेत्र में जैविक एवं प्राकृतिक कृषि, नर्मदा नदी एवं उसकी सहायक नदियों का संरक्षण, नर्मदा घाट एवं नर्मदा परिक्रमावासियों की सुविधाओं तथा घाट संस्कृति एवं घाट संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने इन विषयों को लेकर स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले कार्यों की कार्ययोजना भी तैयार की।विशिष्ट अतिथि मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष पद्मश्री मोहन नागर ने कहा कि नर्मदा की निर्मलता और अविरलता के लिए केवल मुख्य नदी पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। नर्मदा की सहायक नदियों और उनके जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सहायक नदियों को बचाने के लिए जंगलों की कटाई रोकना, अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना तथा नदियों में पहुंचने वाले प्रदूषित एवं गंदे पानी को रोकना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सहायक नदियों का जल नर्मदा में निरंतर प्रवाहित होता रहे, इसके लिए उनके उद्गम क्षेत्रों से लेकर नर्मदा में मिलने तक संरक्षण की सतत व्यवस्था करनी होगी। सहायक नदियों के किनारे बसे गांवों को भी इस अभियान से जोड़कर वहां स्वच्छता, जल संरक्षण और वृक्षारोपण के कार्य किए जाने चाहिए।
श्री मोहन नागर ने नर्मदा परिक्रमा की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने नर्मदा को केवल नदी नहीं, बल्कि जीवनदायिनी मां के रूप में देखा है। नर्मदा परिक्रमा के माध्यम से नदी और उसके तट से समाज का भावनात्मक संबंध मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि नर्मदा संरक्षण का कार्य केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की सहभागिता से ही सफल हो सकता है।
उन्होंने नर्मदा से जुड़े गांवों और समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर कार्य करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को नर्मदा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण के लिए अपनी भूमिका तय करनी होगी। इसके लिए स्थानीय स्तर पर निरंतर जनजागरण, स्वच्छता, वृक्षारोपण और जल संरक्षण के कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
कार्यशाला में यह भी तय किया गया कि सहायक नदियों के संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करने वाली टीमों को सक्रिय किया जाएगा तथा पुनः वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियानों को गति दी जाएगी। साथ ही नर्मदा के किनारे और सहायक नदियों से जुड़े क्षेत्रों में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
संवाद का मूल संदेश रहा कि नर्मदा मैया की सेवा केवल मुख्य धारा की स्वच्छता तक सीमित नहीं है। उनकी प्रत्येक सहायक नदी, जलस्रोत, जंगल और जलग्रहण क्षेत्र की रक्षा करना ही नर्मदा संरक्षण का वास्तविक आधार है।
