नई दिल्ली । देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और कवरेज बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभाव को लेकर जारी ताजा आंकड़ों में वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के व्यापक विस्तार का दावा किया गया है। सरकार के अनुसार आयुष्मान भारत वय वंदना योजना के तहत अब तक 1.20 करोड़ से अधिक वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि इस योजना के अंतर्गत 13.84 लाख से अधिक उपचार किए गए हैं। इन उपचारों पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये की लागत आई है।
सरकार का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य बढ़ती उम्र के साथ उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान करना और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना है। योजना के माध्यम से लाखों बुजुर्गों को अस्पतालों में उपचार और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिला है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में चलाए जा रहे टीकाकरण अभियानों को लेकर भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां सामने आई हैं। मिशन इंद्रधनुष के तहत उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक टीकाकरण सेवाएं पहुंचाई गईं, जो पहले नियमित टीकाकरण से वंचित रह गए थे। अभियान के अंतर्गत 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया। इससे देश में पूर्ण टीकाकरण कवरेज को मजबूत करने में मदद मिली है।
सरकार के अनुसार बिना किसी टीके वाले बच्चों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में ऐसे बच्चों की हिस्सेदारी कुल आबादी का 0.11 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2024 में घटकर 0.06 प्रतिशत रह गई। इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक प्रगति का संकेत माना जा रहा है।
सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत प्रत्येक वर्ष करोड़ों नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए निःशुल्क टीके उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस कार्यक्रम ने देश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य संकेतकों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भी प्रमुख भूमिका निभा रही है। योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाता है। सरकार के अनुसार अब तक 44.14 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं और 12.03 करोड़ अस्पताल भर्ती मामलों का लाभार्थियों को फायदा मिला है। इन उपचारों का कुल मूल्य लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।
देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अस्पताल नेटवर्क का भी विस्तार किया गया है। वर्तमान में 36 हजार से अधिक अस्पताल इस योजना से जुड़े हुए हैं, जिनमें सरकारी और निजी दोनों संस्थान शामिल हैं। इससे लाभार्थियों को अपने क्षेत्र के निकट उपचार सुविधाएं प्राप्त करने में सहायता मिली है।
सरकार ने यह भी बताया कि 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा टेलीमेडिसिन सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है और अब तक 47 करोड़ से अधिक डिजिटल परामर्श सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों, एम्स संस्थानों तथा डॉक्टरों और नर्सों के प्रशिक्षण की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सरकार का दावा है कि इन पहलों के माध्यम से देश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और व्यापक बनाया जा रहा है।
