नई दिल्ली में आयोजित एक बड़े बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत की आर्थिक नींव स्थिर और मजबूत बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के विभिन्न देश अब भारत की क्षमता और स्थिरता पर अधिक विश्वास जता रहे हैं, जो देश की बढ़ती आर्थिक ताकत का संकेत है।
उन्होंने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि केवल सरकार के प्रयासों से आर्थिक प्रगति संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए उद्योग जगत, व्यापार क्षेत्र और आम नागरिकों के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक है। उनका मानना है कि जब सभी हिस्से मिलकर काम करते हैं, तभी देश की आर्थिक गति और अधिक मजबूत होती है।
पीयूष गोयल ने भारतीय उद्योगों से यह भी अपील की कि वे घरेलू आपूर्तिकर्ताओं और स्थानीय उत्पादन को प्राथमिकता दें। उनके अनुसार, बदलते वैश्विक माहौल में आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी औद्योगिक क्षमता को भीतर से मजबूत करना होगा, ताकि बाहरी निर्भरता कम हो सके।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई विकसित देश अपने घरेलू उद्योगों को प्राथमिकता देकर मजबूत औद्योगिक नेटवर्क तैयार कर चुके हैं। भारत को भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है, जहां उद्योग एक-दूसरे का समर्थन करें और देश के भीतर मजबूत सप्लाई चेन विकसित हो।
मंत्री ने यह भी कहा कि आज की परिस्थितियों में सामान्य व्यापारिक सोच से आगे बढ़ने की जरूरत है। वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए भारत को अपनी रणनीति को और अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना होगा। उनका कहना था कि यह केवल एक विकल्प नहीं बल्कि भविष्य की जरूरत है।
उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत की आर्थिक मजबूती केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास का परिणाम है जो दुनिया अब भारत पर जता रही है। विभिन्न वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश ने उत्पादन, निवेश और विकास के क्षेत्र में लगातार प्रगति दिखाई है।
