विशेषज्ञों का मानना है कि बुधवार को बाजार की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों से तय होगी। सबसे बड़ा सहारा बैंकिंग और वित्तीय शेयरों से मिलने की उम्मीद है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक असर बाजार में दिखाई दे रहा है। इसी वजह से सरकारी और निजी बैंकों के शेयरों में खरीदारी का माहौल बना हुआ है।
वैश्विक स्तर पर भी माहौल कुछ हद तक सकारात्मक नजर आ रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से निवेशकों की चिंता घटी है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट राहत की खबर मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होता है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,200 का स्तर अहम सपोर्ट बन गया है। यदि बाजार इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो आने वाले दिनों में और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं 23,400 से 23,500 का स्तर निकट भविष्य में महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है। निवेशकों को इस दायरे पर विशेष नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी लगातार निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। पिछले सत्र में इन दोनों सूचकांकों ने प्रमुख इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया, जो बाजार की व्यापक मजबूती का संकेत है। यदि यही रुझान जारी रहता है तो 10 जून को भी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं।
हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की भी सलाह दे रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां, अमेरिकी बाजारों का रुख, डॉलर-रुपया विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। ऐसे में किसी भी निवेश निर्णय से पहले बाजार की चाल और खबरों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, 10 जून का शेयर बाजार सकारात्मक संकेतों के साथ शुरुआत कर सकता है। यदि बैंकिंग शेयरों में खरीदारी और वैश्विक बाजारों का समर्थन बना रहता है तो सेंसेक्स और निफ्टी में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए यह दिन अवसरों और सतर्कता दोनों का मिश्रण रहने वाला है।
