Skip to content
April 26, 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
  • whatsapp
hindsantri.com

hindsantri.com

ताजा खबरों की

banner-promo-full-red

Connect with Us

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
  • whatsapp
Primary Menu
  • भारत
  • विदेश
  • मध्‍य प्रदेश
    • भोपाल संभाग
    • इंदौर संभाग
    • उज्जैन संभाग
    • ग्वालियर संभाग
    • चंबल संभाग
    • जबलपुर संभाग
    • नर्मदापुरम संभाग
    • रीवा संभाग
    • शहडोल संभाग
    • सागर संभाग
  • आर्थिक
  • खेल समाचार
  • सिनेमा जगत
  • विविधा
    • तकनीकी
    • व्यंग्य
    • आलोचना
    • संस्कृति
    • पुरातत्व
    • कलाजगत
    • महिला जगत
    • बालजगत
  • साहित्य/आध्यात्म
    • विचार
    • धर्म
    • लेख
    • पुस्तक समीक्षा
    • साक्षात्कार
  • Admin Panel
  • हमारे बारे में
  • प्रेस विज्ञप्ति
  • Press Release
  • Home
  • आर्थिक
  • महंगाई दर में जोरदार गिरावट… 14 साल के निचले स्तर पर पहुंची
  • आर्थिक

महंगाई दर में जोरदार गिरावट… 14 साल के निचले स्तर पर पहुंची

Atmaram yadav November 24, 2025 1 minute read

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Click to share on X (Opens in new window) X
  • Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
  • Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram
000000000000-1763965190-1
Post Views: 51

नई दिल्ली।  रिजर्व बैंक का लक्ष्य है कि महंगाई दर को चार प्रतिशत या उससे दो फीसदी ऊपर-नीचे के दायरे में रखा जाए। यानी, एक अच्छी अर्थव्यवस्था में दो से छह प्रतिशत तक की महंगाई दर को बर्दाश्त करने लायक माना जाता है।

इस वक्त महंगाई पिछले 14 साल में सबसे कम है। अगर विकास की रफ्तार तेज करने में कामयाबी मिल जाए, तो शायद महंगाई थोड़ी बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था का भविष्य बेहतर हो सकेगा। रिजर्व बैंक की जिम्मेदारी यही है कि वह महंगाई की लगाम इतनी कसे कि अर्थव्यवस्था का घोड़ा न तो बेरोकटोक भागे और न ही रुकने को मजबूर हो जाए।

छह प्रतिशत से ऊपर महंगाई का मतलब होता है कि हालात ठीक नहीं हैं, लेकिन दो फीसदी से कम होने का मतलब भी कुछ ऐसा ही होता है। जनवरी में भारत की खुदरा महंगाई दर 4.3 प्रतिशत थी, जो अब गिरकर 0.25 फीसदी पर पहुंच गई है। थोक महंगाई दर तो शून्य के भी नीचे यानी (-)1.21 प्रतिशत पर है। शून्य के नीचे होने का अर्थ है कि दाम बढ़ने के बजाय गिर रहे हैं। सुनकर तो यह अच्छा लगता है, लेकिन क्या वास्तव में यह अच्छी हालत है? बहुत से लोग पूछ रहे हैं कि महंगाई अगर 1979 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गई है, तो बाजार में इसका असर क्यों नहीं दिखता? वहां तो चीजें सस्ती नहीं मिल रही हैं!

यहां इस किस्से में एक पेच है। अर्थशास्त्र की भाषा में इसे ‘बेस इफेक्ट’ कहते हैं, यानी जिस चीज को आप देख रहे हैं, उसकी तुलना किससे कर रहे हैं? महंगाई के मामले में यह तुलना होती है एक साल पहले के आंकड़े से। इस वक्त महंगाई दर में जबर्दस्त गिरावट दिखने की वजह यह भी है कि पिछले साल इन्हीं महीनों में महंगाई की चाल ऊपर की ओर थी। इसे यूं भी समझ सकते हैं कि अगर पिछले साल सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में महंगाई में तेज बढ़त थी और इस साल सितंबर और अक्टूबर में दाम बराबर रहे, तब भी अक्टूबर में महंगाई का आंकड़ा गिरावट दिखाएगा। यह बात सिर्फ अक्टूबर की नहीं है। अप्रैल, मई, जून, जुलाई और सितंबर में भी यही असर पड़ रहा था, कहीं कम तो कहीं ज्यादा।

लेकिन अब जब महंगाई दर काफी नीचे पहुंच चुकी है, तो इसका उल्टा असर शुरू होता है। आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली एक रिपोर्ट का अनुमान है कि तीन महीनों तक महंगाई दर शून्य से नीचे दिख सकती है। इसका मतलब यह होगा कि फिर अगले साल इन्हीं महीनों में ‘बेस इफेक्ट’ का असर उल्टा दिखेगा और तब अचानक महंगाई तेज दिखने लगेगी। महंगाई के आंकड़े में इस बार एक-दो बातें और देखने लायक हैं। एक तो महंगाई कम होने की सबसे बड़ी वजह है, खाने-पीने की चीजों के दाम गिरना। अक्टूबर में खाद्य महंगाई दर शून्य से पांच प्रतिशत नीचे के रिकॉर्ड स्तर पर थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में इसकी हिस्सेदारी 39 प्रतिशत की है। जाहिर है, यह गिरेगा, तो महंगाई गिरेगी, लेकिन इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है।

खाने-पीने की कुछ चीजों के दाम तेजी से गिरते-उठते हैं। एक या दो चीजों के दाम में तेज उतार-चढ़ाव भी महंगाई के आंकड़े को बना या बिगाड़ सकता है। इसी तरह की रफ्तार पेट्रोल, डीजल, गैस वगैरह के दाम में भी दिखती है, क्योंकि कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय भावों का असर उन पर पड़ता है। इसीलिए अर्थशास्त्री लंबे दौर में महंगाई का रुख समझने के लिए ‘कोर इनफ्लेशन’ का इस्तेमाल करते हैं। यहां महंगाई दर में वह आंकड़ा इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें खाद्य पदार्थों व ऊर्जा को बाहर करके बाकी हिसाब जोड़ा जाता है। इस कसौटी पर महंगाई की तस्वीर कुछ और हो जाती है।

यहां महंगाई का आंकड़ा 4.4 प्रतिशत पर दिख रहा है। शायद यही उस सवाल का जवाब है कि महंगाई इतनी कम हो गई है, तो बाजार में दिखती क्यों नहीं? ऐसा इसलिए भी होता है, क्योंकि एक मध्यवर्गीय परिवार के ज्यादातर जरूरी खर्च यहीं जोड़े जाते हैं। घर का किराया, स्कूल की फीस, दवा, रिक्शा, टैक्सी या बस, ट्रेन के किराये, रेस्तरां में खाने का खर्च और सभी तरह की सेवाओं की फीस इसमें शामिल होती है। ये वे खर्च हैं, जिनमें कमी नहीं हो रही, बल्कि इनमें से कई धीरे-धीरे बढ़े ही हैं।

इस बार महंगाई का गणित बिगाड़ने वाली एक और चीज है- सोने-चांदी का भाव। इन दोनों के दाम बेतहाशा बढ़े हैं और इसका असर भी कोर महंगाई पर दिख रहा है। हालांकि, महंगाई के आंकड़े में इनका वजन बहुत नहीं है, पर बढ़ते दाम के साथ इनका दबदबा भी बढ़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के हिसाब से जहां पिछले साल की शुरुआत में इन दोनों धातुओं का महंगाई के आंकड़े में एक फीसदी के दसवें हिस्से से भी कम का योगदान था, वहीं इस अक्टूबर तक यह बढ़कर 0.88 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। लगभग दस गुना।

अगर यह सब दरकिनार करके मान लिया जाए कि महंगाई दर में तेज गिरावट आ चुकी है और आगे भी कुछ समय तक आती रहेगी, तो क्या यह खुशखबरी नहीं है? आखिर रिजर्व बैंक महंगाई दर को 4 प्रतिशत पर क्यों रखना चाहता है? जवाब यह है कि अगर चीजों के दाम बढ़ेंगे नहीं, तो व्यापारियों के लिए उन्हें बनाना व बेचना फायदे का सौदा नहीं रह जाएगा। तब उनकी और देश की तरक्की कैसे होगी? बहुत कम महंगाई का मतलब यह भी माना जाता है कि बाजार में मांग कम हो रही है, लोग पैसे खर्च नहीं करना चाहते और इसीलिए व्यापारी दाम बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। कंपनियां अगर दाम नहीं बढ़ा पाएंगी, तो वे नया निवेश क्यों करेंगी?

जापान में महंगाई दर शून्य ने पैदा किया संकट

साल 1990 तक जापान दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन उसके बाद कई साल तक वहां महंगाई दर शून्य हो गई। इससे जो संकट पैदा हुआ, आज 30 साल बाद भी जापान उससे उबरने की कोशिश में लगा है। इन तीन दशकों को जापान में ‘लॉस्ट डिकेड्स’ कहा जाता है। यूरोप में 2012 से 16 तक महंगाई दर गिरकर एक फीसदी से नीचे पहुंच गई थी। इसके नतीजे यूरोप ही नहीं, बाकी दुनिया को भी भुगतने पड़े। ब्याज दर घटाकर शून्य करनी पड़ी। आर्थिक विकास पर ब्रेक लग गया और बेरोजगारी का विस्फोट हो गया। साल 2008 के भुगतान संकट के बाद अमेरिका को भी करीब-करीब ऐसी ही मुसीबत से जूझना पड़ा था।

About the Author

Avatar photo

Atmaram yadav

Editor

Visit Website View All Posts

Like this:

Like Loading...

Post navigation

Previous: महंगाई दर में जोरदार गिरावट… 14 साल के निचले स्तर पर पहुंची
Next: टेस्ट सीरीज के लिए न्यूजीलैंड टीम का ऐलान, लंबे समय बाद केन विलियमसन वापसी

Related News

21-1777199807
  • आर्थिक

शेयर बाजार में अगले हफ्ते बड़ा उतार-चढ़ाव संभव, ग्लोबल फैक्टर्स रहेंगे अहम..

hindsantri April 26, 2026 0
11-1777193971
  • आर्थिक

टैक्स प्लानिंग 2027: पुरानी और नई व्यवस्था में से कौन देगा ज्यादा फायदा, जानिए पूरा गणित..

hindsantri April 26, 2026 0
31-1777118065
  • आर्थिक

नीति आयोग को मिला बड़ा महत्व, पीएम मोदी ने बताया देश की नीति-निर्माण व्यवस्था का मजबूत स्तंभ

hindsantri April 25, 2026 0

इन्‍हें भी पढ़ें

पंच परिवर्तन से स्थापित होगा भारतीयता का गौरव : सुरेश सोनी p9-1777209191
  • मध्‍य प्रदेश

पंच परिवर्तन से स्थापित होगा भारतीयता का गौरव : सुरेश सोनी

April 26, 2026 0
अमित शाह का बड़ा ऐलान: सत्ता में आते ही खत्म करेंगे टीएमसी का सिंडिकेट सिस्टम 28-1777204540
  • भारत

अमित शाह का बड़ा ऐलान: सत्ता में आते ही खत्म करेंगे टीएमसी का सिंडिकेट सिस्टम

April 26, 2026 0
सदाबहार अदाकारा रेखा के ये गाने आज भी हैं संगीत प्रेमियों की पहली पसंद.. 23-1777203999
  • सिनेमा जगत

सदाबहार अदाकारा रेखा के ये गाने आज भी हैं संगीत प्रेमियों की पहली पसंद..

April 26, 2026 0
मध्यप्रदेश में MPPSC एग्जाम शुरू, नए नियम लागू 90 मिनट पहले पहुंचना जरूरी 26-25-1777203865
  • मध्‍य प्रदेश

मध्यप्रदेश में MPPSC एग्जाम शुरू, नए नियम लागू 90 मिनट पहले पहुंचना जरूरी

April 26, 2026 0
डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद 26-24-1777203352
  • मध्‍य प्रदेश

डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद

April 26, 2026 0
टीकमगढ़ में बीच बाजार हंगामा शराबी पति ने पत्नी को पीटा कपड़े फाड़कर किया ड्रामा 26-23-1777202923
  • मध्‍य प्रदेश

टीकमगढ़ में बीच बाजार हंगामा शराबी पति ने पत्नी को पीटा कपड़े फाड़कर किया ड्रामा

April 26, 2026 0

Recent Posts

  • पंच परिवर्तन से स्थापित होगा भारतीयता का गौरव : सुरेश सोनी
  • अमित शाह का बड़ा ऐलान: सत्ता में आते ही खत्म करेंगे टीएमसी का सिंडिकेट सिस्टम
  • सदाबहार अदाकारा रेखा के ये गाने आज भी हैं संगीत प्रेमियों की पहली पसंद..
  • मध्यप्रदेश में MPPSC एग्जाम शुरू, नए नियम लागू 90 मिनट पहले पहुंचना जरूरी
  • डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद

You may have missed

p9-1777209191
  • मध्‍य प्रदेश

पंच परिवर्तन से स्थापित होगा भारतीयता का गौरव : सुरेश सोनी

hindsantri April 26, 2026 0
28-1777204540
  • भारत

अमित शाह का बड़ा ऐलान: सत्ता में आते ही खत्म करेंगे टीएमसी का सिंडिकेट सिस्टम

hindsantri April 26, 2026 0
23-1777203999
  • सिनेमा जगत

सदाबहार अदाकारा रेखा के ये गाने आज भी हैं संगीत प्रेमियों की पहली पसंद..

hindsantri April 26, 2026 0
26-25-1777203865
  • मध्‍य प्रदेश

मध्यप्रदेश में MPPSC एग्जाम शुरू, नए नियम लागू 90 मिनट पहले पहुंचना जरूरी

hindsantri April 26, 2026 0

हमारे बारे में

“hindsantri.com” में आप सभी का स्‍वागत है। यहां आपको देश और दुनिया की खबरें पढ़ने को मिलेंगी। इसके साथ ही कई अन्‍य कैटेगरी में खबरों को प्रसारित किया जाता है। प्रतिदिन पाठकों को नवीनतम समचार से अपडेट कराते रहेंगे।

Editor-in-Chief : Atmaram Yadav
Shri Jagannath Dham
Behind Kali Temple, Ward No. 31, Gwal Toli
Narmadapuram, 461001

Recent Posts

  • पंच परिवर्तन से स्थापित होगा भारतीयता का गौरव : सुरेश सोनी
  • अमित शाह का बड़ा ऐलान: सत्ता में आते ही खत्म करेंगे टीएमसी का सिंडिकेट सिस्टम
  • सदाबहार अदाकारा रेखा के ये गाने आज भी हैं संगीत प्रेमियों की पहली पसंद..
  • मध्यप्रदेश में MPPSC एग्जाम शुरू, नए नियम लागू 90 मिनट पहले पहुंचना जरूरी
  • डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद

Categories

Uncategorized आर्थिक इंदौर संभाग उज्जैन संभाग कविता कहानी खेल समाचार ग्वालियर संभाग चंबल संभाग जबलपुर संभाग तकनीकी धर्म नर्मदापुरम संभाग बिहार भारत भोपाल संभाग मध्‍य प्रदेश महिला जगत रीवा संभाग लाइफस्‍टाइल लेख विचार विदेश विविधा व्यंग्य शहडोल संभाग संस्कृति सागर संभाग साहित्य/आध्यात्म सिनेमा जगत
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
  • whatsapp
Copyright © All rights reserved. | hindsantri by AMAP themes.
%d