राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद से ही सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई थी। कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी के बाद अब डीके शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार बनाने की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है, जिसके बाद शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार डीके शिवकुमार ने अपने पारिवारिक ज्योतिषी से विचार-विमर्श के बाद 3 जून की तारीख को शपथ ग्रहण के लिए उपयुक्त माना है। राजनीतिक और व्यक्तिगत निर्णयों में धार्मिक और ज्योतिषीय परामर्श की परंपरा रखने वाले शिवकुमार के इस फैसले को भी चर्चा का विषय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कार्यक्रम बेहद सादगीपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ-साथ नई सरकार की नींव रखी जाएगी।
नई सरकार के गठन के साथ ही मंत्रिमंडल को लेकर भी रणनीति तेज हो गई है। पार्टी के भीतर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए उपमुख्यमंत्री पदों के दो नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इनमें एक प्रतिनिधित्व दलित समुदाय से और दूसरा अल्पसंख्यक समुदाय से हो सकता है। इस रणनीति को राज्य के विविध सामाजिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित राजनीतिक समीकरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य सभी प्रमुख वर्गों को साथ लेकर चलना बताया जा रहा है।
कांग्रेस नेतृत्व आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए नई सरकार में युवाओं और विभिन्न सामाजिक समूहों को अधिक प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार कर रहा है। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए उनके परिवार से भी किसी प्रमुख भूमिका में शामिल किए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इससे पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की कोशिश स्पष्ट रूप से नजर आती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक में यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक दिशा को भी तय करेगा। राज्य में स्थिर सरकार देने की चुनौती के साथ नई टीम को विकास और संगठनात्मक मजबूती दोनों पर ध्यान देना होगा। वहीं कांग्रेस के लिए यह कदम आगामी चुनावों से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल के नामों और शपथ ग्रहण की अंतिम तिथि को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है, जिसके बाद कर्नाटक की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा
