राजनाथ सिंह ने यह बात उस अवसर पर कही जब नई दिल्ली में ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित एक स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे और पूरा वातावरण राष्ट्रीय भावना और गर्व से परिपूर्ण दिखाई दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह प्रकाशन केवल घटनाओं का संकलन नहीं है, बल्कि उन सैनिकों के अनुभवों, संघर्षों और साहस की कहानी भी प्रस्तुत करता है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि इसमें नेतृत्व क्षमता, मानसिक दृढ़ता और सही निर्णय लेने की क्षमता निर्णायक भूमिका निभाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भारतीय सशस्त्र बल अब पारंपरिक युद्ध सीमाओं से आगे बढ़कर तेज, सटीक और बहुआयामी अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं। उनके अनुसार यह अभियान भारत की सैन्य रणनीति में आए बड़े बदलाव का संकेत है, जिसमें तकनीक, समन्वय और त्वरित निर्णय क्षमता को केंद्र में रखा गया है। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि ऐसे अभियानों से न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत की स्थिति अधिक सशक्त होती है।
इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी सहित सशस्त्र बलों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर के रणनीतिक पहलुओं, संयुक्त सैन्य समन्वय और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह अभियान भारतीय सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसने यह स्पष्ट किया है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।
राजनाथ सिंह ने नागरिकों से भी अपील की कि वे इस प्रकार के प्रकाशनों और अनुभवों से प्रेरणा लें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले जिम्मेदार नागरिक बनें। उन्होंने कहा कि जब सैनिक सीमाओं पर अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार रहते हैं, तब समाज का भी कर्तव्य बनता है कि वह देश की एकता, सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति सजग और समर्पित रहे।
