नई दिल्ली । पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या रंधावा कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि स्वयं रंधावा ने इन अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी मुलाकात का उद्देश्य केवल पंजाब की कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना था।
रंधावा की इस मुलाकात का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और सभी दल अपनी राजनीतिक रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसी बीच कांग्रेस संगठन में हाल ही में हुए फेरबदल के बाद रंधावा को मिली नई जिम्मेदारी को लेकर उनकी नाराजगी की चर्चा भी लगातार सामने आती रही है। ऐसे माहौल में गृह मंत्री से हुई उनकी मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी।
हाल ही में गठित पंजाब कांग्रेस की नई टीम में रंधावा को कोर कमेटी का प्रमुख बनाया गया है। राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि वह संगठन में अधिक प्रभावशाली भूमिका की उम्मीद कर रहे थे। उनके करीबी नेताओं का भी मानना है कि नई जिम्मेदारी को लेकर वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि रंधावा ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है।
बीजेपी में शामिल होने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए रंधावा ने साफ कहा कि उनकी मुलाकात पूरी तरह प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी विषयों पर केंद्रित थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर पंजाब के सीमावर्ती जिलों में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी गतिविधियों, नार्को-टेररिज्म, गैंगस्टर नेटवर्क और कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर मामलों की जानकारी दी थी। इन्हीं पत्रों के आधार पर उन्हें चर्चा के लिए बुलाया गया।
रंधावा के अनुसार उन्होंने बैठक में गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और पठानकोट जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति का विस्तृत विवरण रखा। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार गैंगस्टर गिरोह, अवैध वसूली, सीमा पार से होने वाली गतिविधियां और अपराधी नेटवर्क राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने जेलों के भीतर से मोबाइल फोन के इस्तेमाल और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर भी चिंता जताई।
बैठक के दौरान केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। रंधावा का कहना है कि यदि केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इन परिस्थितियों को गंभीर मानती है तो आवश्यक कार्रवाई करना उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य और देश की सुरक्षा किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर है और इसी भावना के साथ उन्होंने अपनी चिंताओं को सरकार के सामने रखा।
फिलहाल रंधावा ने भाजपा में शामिल होने की सभी अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है, लेकिन उनकी अमित शाह से मुलाकात ने पंजाब की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। चुनावी माहौल में यह घटनाक्रम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति की दिशा पर इसका असर पड़ सकता है। कांग्रेस और भाजपा दोनों की रणनीतियों पर भी अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।
