पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद भारत और पड़ोसी देशों के रिश्तों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कुछ संगठनों ने भारत में मुसलमानों पर अत्याचार के आरोप लगाए थे। हालांकि बांग्लादेश सरकार ने इन दावों को आधारहीन बताया है।
जमात-ए-इस्लामी के आरोपों को किया खारिज
बांग्लादेश ने जमात-ए-इस्लामी और उससे जुड़े संगठनों के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। ढाका प्रशासन का कहना है कि ऐसे दावे किसी प्रमाण या आधिकारिक रिपोर्ट पर आधारित नहीं हैं और इनमें कई बार सोशल मीडिया पर प्रसारित पुरानी या भ्रामक वीडियो का इस्तेमाल किया जाता है।
गृह मंत्री का बयान
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि सरकार के पास भारत में मुसलमानों के खिलाफ किसी भी तरह के उत्पीड़न की कोई पुष्टि नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत या आंकड़े मौजूद नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश के राजनयिक मिशन और विदेश मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक शिकायत सामने नहीं आई है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर रुख
बांग्लादेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह बिना किसी आधार के अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को प्रभावित नहीं करना चाहती। ढाका ने भारत के साथ स्थिर और शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने की इच्छा जताई है। इसके साथ ही सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की संभावना का भी संकेत दिया गया है, हालांकि कहा गया है कि इस पर अभी तक भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली है।
