अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने बताया कि गुरुवार को जिस मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ वह संगठन की आधिकारिक निकासी योजना का हिस्सा नहीं था। इसके बावजूद इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक निकासी सूची में शामिल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती तब तक बचाव अभियान को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र ओमान और कई सदस्य देशों के सहयोग से पिछले कुछ दिनों से फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चला रहे थे। इस विशेष ऑपरेशन का उद्देश्य युद्ध और बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के कारण समुद्र में फंसे जहाजों और उनके चालक दल को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना था।
इसी दौरान ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज एवर लवली पर ड्रोन हमला हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस हमले में किसी नाविक की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है लेकिन घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।
आईएमओ प्रमुख आर्सेनियो डोमिंगेज ने कहा कि निकासी अभियान को फिलहाल अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है और सुरक्षा स्थिति की दोबारा समीक्षा की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी जहाज को तब तक आगे नहीं बढ़ाया जाएगा जब तक सभी संबंधित देशों और एजेंसियों की ओर से सुरक्षित मार्ग की गारंटी नहीं मिल जाती।
बताया जा रहा है कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद लगभग 11 हजार नाविकों को सुरक्षित निकालने की योजना बनाई गई थी। हालांकि ताजा ड्रोन हमले ने इस पूरी प्रक्रिया को झटका दिया है और अब निकासी अभियान अनिश्चितकाल के लिए टल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में अभी भी करीब 20 हजार से अधिक नाविक विभिन्न मालवाहक और वाणिज्यिक जहाजों पर फंसे हुए हैं। इनमें से लगभग 11 हजार लोगों को पहले चरण में सुरक्षित निकालने की योजना तैयार की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक समुद्री व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है।
अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए आरोपों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि ईरान ने अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि सुरक्षा हालात कब सामान्य होंगे और हजारों फंसे नाविकों का रेस्क्यू अभियान दोबारा कब शुरू किया जाएगा।
