कैसे होता है फूड पॉइज़निंग का खतरा
फूड पॉइज़निंग तब होती है जब खाना बैक्टीरिया, वायरस या टॉक्सिन से संक्रमित हो जाता है। बाहर के खाने में कई बार साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता। कच्चे या अधपके भोजन, लंबे समय तक खुले में रखे गए पकवान, गंदे तेल का बार-बार उपयोग और दूषित पानी इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। स्ट्रीट फूड में हाथों की स्वच्छता की कमी भी संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बनती है।
फूड पॉइज़निंग के शुरुआती लक्षण
फूड पॉइज़निंग होने पर शरीर तुरंत संकेत देने लगता है। मरीज को पेट दर्द, मरोड़, उल्टी, दस्त और कमजोरी महसूस होती है। कई मामलों में हल्का बुखार और डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत भी आ सकती है।
किन लोगों के लिए ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग फूड पॉइज़निंग के अधिक शिकार हो सकते हैं। इन लोगों में संक्रमण तेजी से फैलता है और शरीर पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।
स्ट्रीट फूड और बाहर का खाना कितना सुरक्षित
स्ट्रीट फूड भले ही स्वाद में लाजवाब हो, लेकिन सुरक्षा के मामले में हमेशा भरोसेमंद नहीं होता। कई जगहों पर साफ पानी, स्वच्छ बर्तन और सही तरीके से खाना स्टोर करने की व्यवस्था नहीं होती। इसी कारण कई बार लोग एक ही समय में बड़ी संख्या में बीमार हो जाते हैं।
कैसे रखें खुद को सुरक्षित
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर खाना खाते समय कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। हमेशा साफ-सुथरी जगह से ही खाना लें, ताजा और गर्म भोजन का ही सेवन करें, कटे हुए फल या खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचें। खाने से पहले हाथ धोना या सैनिटाइज़र का उपयोग करना भी संक्रमण के खतरे को कम करता है।
कब लें डॉक्टर की सलाह
अगर किसी व्यक्ति को लगातार उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द या कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
