जानकारी के अनुसार, अशोकनगर निवासी केशव सैन इंदौर में एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में कार्य करते हैं। वह नौकरी के साथ-साथ बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और आगामी शैक्षणिक सत्र की फीस जमा करने के लिए लगातार अतिरिक्त समय तक काम कर पैसे बचा रहे थे। उनके अनुसार, खाते में जमा पूरी राशि उनकी शिक्षा और भविष्य की योजनाओं के लिए रखी गई थी।
पीड़ित ने बताया कि अचानक उनके मोबाइल पर बैंक खाते से लगातार ऑनलाइन लेनदेन के संदेश आने लगे। कुछ ही मिनटों के भीतर खाते से कुल 48 हजार रुपये निकल गए। उनका दावा है कि राशि अमेज़न पे के माध्यम से अलग-अलग ट्रांजैक्शन में स्थानांतरित की गई। जब तक वह स्थिति को समझ पाते, खाते की पूरी जमा पूंजी समाप्त हो चुकी थी।
घटना के तुरंत बाद छात्र ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया। पीड़ित का आरोप है कि तत्काल लेनदेन रोकने या तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें नजदीकी पुलिस थाने जाने की सलाह दी गई। इसके बाद वह इंदौर क्राइम ब्रांच पहुंचे, जहां भी उन्हें तत्काल समाधान नहीं मिलने का दावा किया गया। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
पीड़ित का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर त्वरित कार्रवाई होती तो संभवतः राशि को रोका या रिकवर किया जा सकता था। अब फीस जमा करने की समयसीमा नजदीक होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जल्द से जल्द राशि वापस दिलाने की मांग की है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत प्राप्त होने के बाद साइबर ठगी से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित खातों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि रकम के प्रवाह का पता लगाया जा सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन भुगतान सेवाओं और डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे मामलों में किसी भी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिलते ही तुरंत बैंक, साइबर हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस को सूचित करना आवश्यक होता है। साथ ही अनजान लिंक, संदिग्ध कॉल और अविश्वसनीय मोबाइल एप्लिकेशन से सावधानी बरतने की भी सलाह दी जाती है।
यह मामला एक बार फिर साइबर सुरक्षा व्यवस्था, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
