भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पूरी तरह चुनावी मोर्चा संभाले हुए हैं। पिछले दो महीनों से वे दतिया क्षेत्र में सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने के प्रयासों में जुटे हैं। यादव, पाल, क्षत्रिय सहित विभिन्न समाजों के लोगों को भाजपा से जोड़ने के लिए लगातार सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। मई महीने के दौरान कई चरणों में अलग-अलग वर्गों के लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा उपचुनाव से पहले अपने पारंपरिक और नए सामाजिक आधार को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
डॉ. मिश्रा ने विभिन्न कार्यक्रमों में भाजपा की विकासवादी नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को जनता का विश्वास मिलने का दावा किया है। लगातार हो रही सदस्यता गतिविधियों को भाजपा की चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यदि उपचुनाव होता है तो पार्टी की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है।
वहीं कांग्रेस की रणनीति संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने पर केंद्रित है। पार्टी ने दतिया विधानसभा क्षेत्र में ब्लॉक, मंडलम और बूथ स्तर तक बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं को चुनावी प्रबंधन और बूथ स्तर की तैयारियों के निर्देश दिए जा रहे हैं। 2 जून को प्रस्तावित बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन कांग्रेस के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट चयन को लेकर है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती अपने बेटे को टिकट दिलाने की कोशिशों में लगे हैं। दूसरी ओर पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक भी मजबूत दावेदार के रूप में सामने आए हैं। नायक का तर्क है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी हित में त्याग किया था, इसलिए इस बार उन्हें मौका मिलना चाहिए। इसके अलावा कई अन्य नेता भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं, जिससे पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल संगठनात्मक एकता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है ताकि उपचुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दी जा सके।
इधर आजाद समाज पार्टी भी दतिया में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगी है। पार्टी नेता दामोदर यादव लगातार किसान सम्मेलनों, जनसंपर्क अभियानों और कार्यकर्ता बैठकों के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। उनका दावा है कि बसपा और कांग्रेस के कई कार्यकर्ता उनकी पार्टी से जुड़ रहे हैं। पार्टी ने उन्हें संभावित उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुकाबला भले ही भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा दिखाई दे रहा हो, लेकिन आजाद समाज पार्टी की सक्रियता चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। खासकर यदि दामोदर यादव कुछ खास सामाजिक वर्गों और असंतुष्ट मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में सफल रहते हैं तो मुकाबला त्रिकोणीय रंग ले सकता है।
उधर निर्वाचन आयोग ने भी उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। दतिया में ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर भी चुनावी तैयारियां गति पकड़ रही हैं।
दतिया उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में प्रभाव और संगठनात्मक ताकत की परीक्षा भी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा, सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे इस चुनाव की दिशा तय करेंगे।
