महावीर नगर और आसपास की कॉलोनियों के लोग वर्षों से नर्मदा जलापूर्ति योजना का इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र में आज तक नर्मदा की पाइपलाइन नहीं पहुंच सकी है, जिसके कारण लोग बोरिंग और टैंकरों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं। लेकिन अब जब बोरिंग का पानी भी दूषित होने लगा है, तो लोगों की चिंता और बढ़ गई है। रहवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
स्थानीय निवासी बसंत राव निकम बताते हैं कि पिछले 35 वर्षों से वे इस क्षेत्र में रह रहे हैं और अक्सर बोरिंग के पानी में गंदगी तथा सीवरेज की समस्या देखने को मिलती है। शिकायत के बाद निगम की टीम चैंबर साफ कर देती है, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। उनका कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।
इसी तरह क्षेत्र की अन्य महिलाओं ने भी अपनी परेशानी साझा की। सीमा साखले और ममता मालवीय का कहना है कि वे कई वर्षों से यहां रह रही हैं, लेकिन आज तक नर्मदा जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल पाया। ऐसे में उन्हें मजबूरी में बोरिंग का पानी इस्तेमाल करना पड़ता है, जो कई बार दूषित निकलता है।
इस बीच एक मासूम बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद मामला और गंभीर हो गया। बच्ची के पिता नागेश्वर खालोटिया का दावा है कि दूषित पानी के सेवन के कारण उनकी बेटी अविका खालोटिया गंभीर रूप से बीमार हो गई। उसे लगातार दस्त, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने लगीं। इंदौर के अस्पतालों में उपचार के बाद भी जब स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो परिवार उसे बेहतर इलाज के लिए अहमदाबाद लेकर गया। चिकित्सकों ने संक्रमण की पुष्टि की और दूषित भोजन या पानी को संभावित कारण बताया।
रहवासियों का कहना है कि केवल एक बच्ची ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोग भी उल्टी-दस्त और पेट संबंधी बीमारियों से प्रभावित हुए हैं। इससे पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। लोगों को डर है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित बोरिंग को बंद कर दिया गया है और नई बोरिंग कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। साथ ही अमृत-2 योजना के तहत 30 लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी और नई जलापूर्ति व्यवस्था विकसित करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार आगामी कुछ महीनों में इस दिशा में काम शुरू हो सकता है, जिससे क्षेत्र की 30 से 40 कॉलोनियों को लाभ मिलेगा।
फिलहाल महावीर नगर के लोग स्वच्छ पानी और नर्मदा लाइन के इंतजार में हैं। उनका कहना है कि विकास के दावों के बीच यदि लोगों को आज भी पीने के सुरक्षित पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
