धनराज यादव नगरप्रतिनिधि
नर्मदापुरम 02,नवंबर,2026(हिन्द संतरी ) मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती तृप्ति शर्मा की उपस्थिति में सोमवार को केंद्रीय जेल नर्मदापुरम के खंड-अ, खंड-ब एवं खुली जेल में निरीक्षण सह जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।
इस दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती तृप्ति शर्मा ने केंद्रीय जेल के विभिन्न खंडों का निरीक्षण कर बंदियों से संवाद किया। उन्होंने बंदियों के रहन-सहन, जेल में उपलब्ध सुविधाओं, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। साथ ही बंदियों को मानवीय संवेदनाओं के साथ जीवन में सकारात्मक सोच अपनाने तथा समाज की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर कक्षा पांचवीं उत्तीर्ण करने वाले बंदियों को अंकसूची भी प्रदान की गई। कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव दीपक चौधरी, जिला विधिक सहायता अधिकारी अभय सिंह, जेल अधीक्षक संतोष सोलंकी, जेल के कर्मचारी एवं बंदी उपस्थित रहे।

सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विद्यार्थियों को किया जागरूक
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती तृप्ति शर्मा के नेतृत्व में सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत सोमवार को प्रियंका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री दीपक चौधरी, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री अभय सिंह, विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती उमा शिवहरे, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के संरक्षण एवं सुरक्षित भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से बाल अधिकार, बाल संरक्षण, बाल श्रम, बाल विवाह, बाल शोषण तथा बच्चों के प्रति होने वाले विभिन्न अपराधों के संबंध में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना अथवा बच्चों के साथ होने वाले अपराध की जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों को देना आवश्यक है। शिविर में विद्यार्थियों को बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने तथा सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। बच्चों के अधिकारों का संरक्षण और उनका सुरक्षित बचपन सुनिश्चित करने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय सहभागिता जरूरी है। कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं को अपने अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया।
