नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 02,नवंबर,2026(हिन्द संतरी ) नर्मदापुरम जिले के विकासखंड माखननगर अंतर्गत तवा नदी के तटीय एवं कछार (नदी पेटे) क्षेत्रों में खेती करने वाले डंगरवाड़ी कृषकों के लिए राहत भरी पहल की गई है। कलेक्टर श्री आशीष वशिष्ठ के मार्गदर्शन में अब इन पट्टाहीन एवं भूमिहीन कृषकों को भी शासन द्वारा अनुदानित रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए डिजिटल कृषि ई-विकास प्रणाली पोर्टल में ‘विशेष प्रावधान/गैर-खातेदार श्रेणी’ के अंतर्गत पंजीयन की व्यवस्था की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि तवा नदी के तटीय एवं कछार क्षेत्रों में किसान परंपरागत रूप से जायद एवं ग्रीष्मकालीन फसलों जैसे लौकी, गिलकी, करेला, ककड़ी, तरबूज एवं खरबूज आदि की खेती करते हैं। इन किसानों के नाम व्यक्तिगत भू-स्वामित्व अथवा खसरा दर्ज नहीं होने के कारण वे ई-विकास पोर्टल के माध्यम से सामान्य प्रक्रिया के तहत उर्वरक के लिए ऑनलाइन ई-टोकन बुक नहीं कर पा रहे थे।
इस समस्या के समाधान के लिए हल्का पटवारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से संबंधित क्षेत्रों का स्थल निरीक्षण कर पात्र कृषकों का भौतिक सत्यापन किया गया है। ई-विकास प्रणाली में उपलब्ध विशेष प्रावधान के तहत इन भूमिहीन एवं पट्टाहीन किसानों की अस्थायी कृषक पहचान पत्र (फार्मर आईडी) जनरेट करने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। मैदानी अमले द्वारा सत्यापित किसानों की सूची के आधार पर उनकी डंगरवाड़ी के संभावित रकबे के अनुसार मानक उर्वरक कोटा निर्धारित किया जाएगा। इससे किसान ई-विकास पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ई-टोकन बुक कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुदानित उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।
प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल भूमि संबंधी दस्तावेज अथवा पंजीयन के अभाव में कोई भी पात्र एवं मेहनतकश किसान शासन की अनुदानित उर्वरक व्यवस्था के लाभ से वंचित न रहे। कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों द्वारा पोर्टल पर पंजीयन की कार्रवाई सतत जारी है, ताकि डंगरवाड़ी किसानों को फसल की आवश्यकता के अनुरूप समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध हो सके।
