आत्माराम यादव प्रधान संपादक
नर्मदापुरम/सीहोर 12 सितम्बर 2026 (हिन्द संतरी) मां बीजासन देवी पर करोड़ों सनातनियों की आस्था ओर अटूट विश्वास है किन्तु जब से मुख्यमंत्री रहते शिवराज ने अपने लंगोटिया मित्र महेश उपाध्याय को इस देवी धाम सलकनपुर ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया है तब से वे 17 सालों से इस ट्रस्ट के अध्यक्ष है, जिनके कार्यकाल में मंदिर में आने वाले लाखों- करोड़ों के चढ़ावे की गणना में शिवराज –महेश मित्रता की अभेद दीवार के कारण पारदर्शिता नदारत रही ओर ट्रस्ट के सदस्य हो या एसडीएम आदि सभी महेश जी के कहे शब्दों को सरकार का आदेश मानते रहे इसलिए कानून को जेब में रखते हुये ट्रस्ट अध्यक्ष महेश उपाध्याय जी ने मंदिर को चढ़ोतरी को इन वर्षों में सार्वजनिक नहीं किया ओर न ही 11 वर्षों से मंदिर ट्रस्ट का आडिट ही कराया, आश्चर्य की बात तो यह है कि अध्यक्ष ने बिना प्रस्ताव लिए 49 करोड़ 56 लाख रुपए खर्च कर अपनी मनमानी जारी रखी। जबकि मंदिर ट्रस्ट को इन वर्षों में होने वाली आय 57 करोड़ 60 हजार रुपए है जिसमें बिना प्रस्ताव लिए 49 करोड़ 56 लाख खर्च कर दी गई, उसके पश्चात मंदिर ट्रस्ट के खाते में 7 करोड़ 45 लाख रुपए होना चाहिए किन्तु 7 करोड़ का हवाला ही गायब है ओर मंदिर ट्रस्ट के की चल-अचल संपत्ति में 47 लाख रूपए नकदी, 5 लाख रूपए अलग अलग बैंकों में, 16 किलो चांदी, 10 तौला सोना और 19 एकड़ कृषि भूमि ही शामिल है।
प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बालसखा महेश उपाध्याय को 11 अगस्त 2005 से 2 जनवरी 2019 तक देवी धाम सलकनपुर ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाए रखा जिसमें ट्रस्ट अध्यक्ष के रूप में महेश उपाध्याय 13 वर्षों तक काबिज रहे। 2019 में कांग्रेस सरकार आने पर ट्रस्ट भंग हो चुका था लेकिन शिवराज की जुगाड़ से कांग्रेसी विधायकों से बनी सरकार के बाद महेश उपाध्याय फिर से अध्यक्ष बने है। ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे श्री उपाध्याय ने वर्ष 2017 तक ही मंदिर समिति के आय व्यय का अंकेक्षण कराया है जिसमें मंदिर में आई चढ़ोत्तरी कि राशि एवं गहनों को लेकर उनकी अपने पद के प्रति पारदर्शिता पर संशय किया गया किन्तु उन्होने किसी भी आरोप के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वहन न कर अपनी मनमानी जारी रखी ओर 10 वर्षों से बिना आडिट किए बिना प्रस्ताव के वे मंदिर समिति को हो रही आय से 50 करोड़ रुपए खर्च कर मंदिर समिति की दुकानों से लेकर होने वाले हर निर्णय में अपना वर्चस्व कम नहीं करना चाहते है। बुदनी के नेताओं की पहुँच केंद्र सरकार, राज्य सरकार सहित संगठन में होने की धोंस दी जाकर देवी धामसलकनपुर ट्रस्ट का गठन 10 जुलाई 2008 में किया गया था जिसमें प्रदेश बीजेपी सरकार के विधायकों मंत्रियों की मौजूदगी में सुदानिया तहसील बुदनी, के शिवराज जी के अपने मित्र ओर उनके द्वारा पूर्व मनोनीत अध्यक्ष अध्यक्ष महेश उपाध्याय मंहत प्रभुदास सलकनपुर और सदस्य भगवान सिंह पटेल रेहटी, भगवान सिंह नागर बायां तथा हरगोविन्द मालवीय सलकनपुर आदि की सहमति बनी ओर वे इस ट्रस्ट के सर्वेसर्वा हो गए। परिणाम स्वरूप देवी धाम सलकनपुर में प्रतिवर्ष 2 करोड़ के लगभग भक्त दर्शन के लिए पूरे साल चले आते है जिसमें लाखो भक्त हजारो किलोमीटर की यात्रा तय करते है उस हिसाब से मंदिर में होने वाली चढ़ोत्तरी ओर अध्यक्ष द्वारा दिखाई चढ़ोत्तरी में जमीन आसमान का फर्क माना जा रहा है, जिसमें लोगों का कहना है की जो यहा दिखाया जा रहा है वह आधा ही है शेष आधा तो प्रसाद के रूप में ये ही पाकर संतुष्ट है।
महाकाल लोक की तर्ज पर 97 करोड़ रुपए की लागत से देवी धाम सलकनपुर का निर्माण ट्रस्ट अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने कराया जिसके घटिया निर्माण होने से वे सवालों के घेरे में है ओर उनके द्वारा परिसर में बनाए गए 64 योगिनी मंदिरों के पिलरों के किनारों से पहली ही बारिश में पानी रिसने लगा बरसात में पानी टपकने ओर दीवारों में दरार की बाते भी अखबारों की सुर्खियों में रही है। करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में बारिश के बाद कई जगहों पर छत और पिलरों से पानी टपकता नजर आया, जबकि परिसर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनना आम बात हो गई है। श्री उपाध्याय के तीन कार्यकाल में जो विकास हुआ उसमें रोप-वे, सीढ़ी निर्माण , मंदिर पुर्ननिर्माण, धर्मशाला, सड़कमार्ग सहित करोड़ो के विकास कराये है। शिवराज सिंह चौहान के सीएम रहते सलकनपुर देवी धाम का तेज गति से काम भी अध्यक्ष महेश उपाध्याय द्वारा कराया गया है, यही कारण है कि उनके द्वारा की गई आर्थिक अनिमितताये चर्चा उनके विकास कार्यों पर सवार होने से लोग उन्हे इसलिए भूल नही पाते है कि इन 13 वर्षों में देवीधाम सलकनपुर का जो जैसा भी अच्छा-बुरा विस्तार हुआ जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा हुई ओर कुछ लोग तो इसे पिकनिक पाइंट मानकर मंदिर की ओर चले आते है।
देवी धाम सलकनपुर परिसर को हराभरा बनाने के उद्देश्य से 10 लाख रुपए खर्च कर ट्री-गार्ड सहित 444 पौधे लगाए गए थे ओर प्रत्येक पौधे पर करीब 1,800 रुपये खर्च किए गए. हालांकि, उचित देखरेख के अभाव में इनमें से लगभग 80 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण और सौंदर्यीकरण के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं. वही सभी कार्यों कि गुणवत्ता अधूरे निर्माण कार्य और खराब रखरखाव ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही प्रत्येक वर्ष ट्रस्ट का आडिट न कराकर मनमाने खर्चों सहित करोड़ों का गोलमाल भी जांच का विषय है, परंतु महेश उपाध्याय इन सब पर भारी है न तो सरकार कुछ करने जाएगी, न जिला प्रशासन न स्थानीय प्रशासन कुछ करेगा ? मंदिर ट्रस्ट में धधक रही यह करोड़ों की आग की लपटों की आंच महेश जी पर नहीं आने वाली है।
